Wed. Oct 28th, 2026

पुट्ठे का भाव गिरा, दिवाली का जुगाड़ हिला, 6-7 महीने बाद उठाव शुरू हुआ तो फैक्ट्री सिंडिकेट ने बिगाड़ दिया खेल, कबाड़ी भी सुस्त, आबकारी के पुट्ठा पुराण में फिर फंसा पेंच—अब कर्मचारी बैठें कहां, सोएं कहां और कार्टून रखें कहां?…

बिलासपुर,,, इसको कहते है! आ बला पकड़ गला आबकारी विभाग ने 6-7 माह बाद ऐन दिवाली के पहले पुट्ठो (कार्टून) को बेचकर दिवाली मनाने का जुगाड़ जमाया तो फैक्ट्री सिंडिकेट ने पुट्ठो के दाम गिरा दिये… जिससे फिर उठाव की रफ्तार धीमी और संकट खड़ा हो गया है!
आबकारी विभाग ने शराब पैकिंग के पुट्ठो (कार्टून) के उठाव के ठेके पर 6-7 माह से रोक लगा रखा था… इसको लेकर जहा शराब दुकानों में पहुचने वाली शराब की नई खेप को रखने का संकट था… वही कर्मचारियों के उठने बैठने की जगह का भी लफड़ा था… मीडियाबाज़ी के बाद विभागीय अफसरो ने तरकारी और केले की तरह दांव पलटकर ऐन दिवाली के पहले किलो के बजाय प्रति नग के हिसाब से रायपुर के एक फर्म से पुट्ठो का सौदा किया… तो विभाग के पुट्ठा दिवाली का हल्ला मचा गया… जमकर किरकिरी हुई, ले देकर उठाव शुरू हुआ तो सारे गणित गुनताड़े पर पानी फिर गया… बताया जा रहा… कि फैक्ट्री सिंडिकेट ने एन टाइम में पुट्ठो का भाव गिराकर लफड़ा खड़ा कर दिया… जिससे यहाँ उठाव की रफ्तार भी धीमी पड़ गई… रायपुर की फर्म ने यहां के लोकल कबाड़ कारोबारियो को इसके उठाव का काम दे रखा है! भाव के उठा पटक के कारण लोकल कबाड़ियों ने भी हिला हवाला शुरू कर दिया… जिससे शराब दुकान के संकटग्रस्त कर्मचारियो का संकट फिर क्या नहायेगा क्या निचोड़ेगा कहा बैठेगा कहा सोएगा और कहा पुट्ठा रखेगा टाइप हो गया…

Author Profile

प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
Latest entries

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed