
बिलासपुर/रायपुर,,, छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है! सूबे की राजनीति में ‘खाकी और खादी’ के बीच एक नई और बेहद तीखी जंग छिड़ चुकी है! इस जंग में फिलहाल खाकी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है! छत्तीसगढ़ कांग्रेस के फायरब्रांड नेता और भिलाई नगर से विधायक देवेन्द्र यादव एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक संकटों के भंवर में फंस गए हैं! बिलासपुर पुलिस ने उनके और NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ सहित कई बड़े नेताओं के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है! यह पहली बार नहीं है! जब विधायक देवेंद्र यादव के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया हो… वे पहले से ही बलौदाबाजार हिंसा और कथित कोयला लेवी घोटाले जैसे बड़े मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाइयों का सामना कर रहे हैं! लेकिन इस बार बिलासपुर में जिस प्रकरण को लेकर उन पर FIR दर्ज हुई है! उसमें सियासत, गुस्सा, प्रदर्शन और एक ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ भी शामिल है! इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है!
आखिर क्यों खींची तलवारें? क्या है! पूरा मामला?...
इस पूरे बवंडर की जड़ में है! देश का सबसे चर्चित NEET पेपर लीक मामला नीट परीक्षा में हुई… कथित धांधली और पेपर लीक को लेकर देशव्यापी आक्रोश का माहौल है! छत्तीसगढ़ से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक केवल एक ही गूंज सुनाई दे रही है! केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए…
इसी मांग को लेकर छात्र संगठन NSUI ने देश भर में उग्र प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू किया है! इसी कड़ी में बिलासपुर में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था…! इस प्रदर्शन को धार देने के लिए दिल्ली से विशेष रूप से NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ बिलासपुर पहुंचे थे… वहीं, युवाओं और छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय माने जाने वाले भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव ने भी इस आंदोलन की कमान संभाल रखी थी…
चश्मदीदों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है! कि प्रदर्शन के दौरान विधायक देवेन्द्र यादव की आक्रामक मौजूदगी ने प्रदर्शनकारियों के जोश को दोगुना कर दिया… देखते ही देखते शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ… आंदोलन उग्र रूप धारण करने लगा… भीड़ को नियंत्रित करने और बैरिकेड्स की सुरक्षा के लिए बिलासपुर पुलिस को कड़े और सख्त कदम उठाने पड़े… पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग करने में भी कोई कोताही नहीं बरती, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई…
‘कुर्ता कांड’ का सस्पेंस: खुद खींचा या पुलिस ने फाड़ा?…
इस पूरे प्रदर्शन के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने पूरे मामले को एक नाटकीय मोड़ दे दिया… पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच चल रही झूमाझटकी के दौरान अचानक यह खबर तेजी से फैली कि पुलिसिया बर्बरता के कारण विधायक देवेन्द्र यादव का कुर्ता फट गया है! कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तुरंत आरोप लगाया कि पुलिस ने जनप्रतिनिधि के साथ बदसलूकी की है! और जानबूझकर उनका कुर्ता फाड़ा गया है…!
कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन को घेरने की पूरी तैयारी में थी… ऐसा लग रहा था… कि यह ‘कुर्ता कांड’ सूबे की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है! लेकिन तभी सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया…
वायरल वीडियो की इनसाइड स्टोरी: सोशल मीडिया पर तेजी से फैले एक छोटे से वीडियो क्लिप के आधार पर यह दावा किया जाने लगा कि विधायक देवेन्द्र यादव का कुर्ता पुलिस ने नहीं, बल्कि उन्होंने खुद अपने हाथों से खींचकर फाड़ा था… ताकि मामले को राजनीतिक रंग दिया जा सके… हालांकि, उस वीडियो की सत्यता और उसकी टाइमिंग को लेकर अब भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं! वीडियो इतना छोटा और धुंधला है! कि उसमें पूरी सच्चाई स्पष्ट रूप से साफ नहीं हो पा रही है! लेकिन इस वीडियो ने पुलिस को बैकफुट से निकालकर फ्रंटफुट पर ला दिया…
एक्शन में बिलासपुर पुलिस:…
इससे पहले कि यह मामला और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ता या कोई बड़ा लॉ एंड ऑर्डर का संकट खड़ा होता… बिलासपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए FIR की कॉपी सामने रख दी… पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया… कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा… चाहे उसका राजनीतिक रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो…
बिलासपुर शहर के एडिशनल एसपी (ASP) पंकज पटेल ने मीडिया को दिए अपने आधिकारिक बयान में बताया कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाया, बल्कि आम जनता के लिए भारी मुसीबत खड़ी की। उन्होंने आम नागरिकों का रास्ता रोका, बैरिकेड्स तोड़े और जमकर हुड़दंग किया। पुलिस ने नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला पंजीकृत किया है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल:...

इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद से बिलासपुर और राजधानी रायपुर के राजनीतिक गलियारों में बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी इस पूरी कार्रवाई को ‘विपक्ष की आवाज दबाने वाली दमनकारी नीति’ करार दे रही है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि बीजेपी सरकार छात्र हितों की बात करने वालों और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं को डराने के लिए पुलिस का दुरुपयोग कर रही है।
दूसरी तरफ, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पुलिस प्रशासन का रुख बेहद कड़ा है। सरकार की तरफ से साफ संकेत हैं कि छत्तीसगढ़ में ‘कानून का राज’ चलेगा और विरोध प्रदर्शन के नाम पर गुंडागर्दी या हुर्दंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
देवेन्द्र यादव पर दर्ज हुई यह नई एफआईआर आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेती है, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या पुलिस इस मामले में विधायक की गिरफ्तारी की तरफ बढ़ेगी या फिर यह मामला सिर्फ राजनीतिक बयानों तक ही सिमट कर रह जाएगा? इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
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