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पाराघाट में जमीन का खेल या बड़ा झोल? 117 एकड़ खरीद से खसरा 170 तक सवालों की बौछार, किसानों का आरोप जमीन गई, नौकरी-पुनर्वास गायब, शासकीय रास्ता भी प्लांट के नाम होने का दावा, अब कलेक्टर के दरबार में पहुंचा पूरा मामला…

बिलासपुर,,, मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पाराघाट, बेलटुकरी और मनोहर क्षेत्र में राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड की भूमि और गतिविधियों को लेकर अब विवाद गहराता नजर आ रहा है! 31 अगस्त को किसानों और ग्रामीणों ने कलेक्टर बिलासपुर के समक्ष अलग-अलग शिकायतें सौंपकर 117 एकड़ जमीन की खरीद, खसरा नंबर 170 में कथित बदलाव, शासकीय रास्ते की जमीन और प्रभावित किसान परिवारों के रोजगार-पुनर्वास को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं!

शिकायतकर्ताओं का आरोप है! कि वर्ष 2003 से 2009 के बीच करीब 117 एकड़ कृषि भूमि किसानों से खरीदी गई थी… लेकिन जमीन खरीदने के बाद लंबे समय तक वहां प्रस्तावित प्लांट स्थापित नहीं किया गया… आरोप है! कि करीब 12-13 साल बाद वर्ष 2022 में उक्त जमीन को राशि पावर प्लांट पाराघाट को बेच दिया गया…. अब किसानों का सीधा सवाल है! जमीन किस उद्देश्य से खरीदी गई थी? खरीद के समय किसानों से क्या वादे किए गए थे? निर्धारित अवधि में भूमि का उपयोग हुआ या नहीं? और यदि जमीन दूसरे प्लांट/कंपनी को हस्तांतरित की गई तो क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी?

खसरा नंबर 170 ने बढ़ाई हलचल….

विवाद का दूसरा बड़ा केंद्र खसरा नंबर 170 है! शिकायत के मुताबिक ग्राम पंचायत मनसेर से पाराघाट नीलागर नदी तक स्थित इस जमीन का रकबा करीब 10.21 एकड़ है! और इसे पूर्व में शासकीय रास्ते के रूप में दर्ज बताया गया है! ग्रामीणों का कहना है! कि यहां मनरेगा के तहत मिट्टी और मुरुम सड़क निर्माण का काम भी कराया गया था… लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है! कि वर्ष 2022 में कथित बंटांकन के बाद करीब 2.94 एकड़ जमीन प्लांट के नाम दर्ज/चढ़ा दी गई… यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है! अगर जमीन शासकीय रास्ते के रूप में दर्ज थी… तो उसका बंटांकन कैसे हुआ? नामांतरण और रिकॉर्ड में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया? ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी गई या नहीं? किसानों ने राजस्व अभिलेखों से लेकर बंटांकन, नामांतरण और भूमि हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है! करीब 40 किसान परिवारों का आरोप- नौकरी और पुनर्वास का वादा कहां गया? तीसरी शिकायत में करीब 40 किसान परिवारों का मुद्दा उठाया गया है! प्रभावित बताए जा रहे परिवारों का आरोप है! कि उनकी जमीन परियोजना से जुड़ी होने के बावजूद उन्हें नौकरी और पुनर्वास का अपेक्षित लाभ नहीं मिला… शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है! कि अपने अधिकारों की मांग करने वाले कुछ किसान परिवारों पर दबाव बनाया जाता है! और पुलिस कार्रवाई का भय दिखाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं!ग्रामीणों की मांग है! कि प्रशासन यह जांच करे कि वास्तव में कितने परिवार परियोजना से प्रभावित हैं! किसे नौकरी या पुनर्वास का अधिकार है! और अब तक किस-किस परिवार को क्या लाभ दिया गया….

कांग्रेस नेताओं और किसानों ने खोला मोर्चा….

मामले को लेकर जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, किसान नेता देव चंद्राकर, जनपद सभापति राजू पंडित के नेतृत्व में शिकायत की गई…इस दौरान पूर्व सरपंच पाराघाट प्रदीप सोनी, कांग्रेस नेता अमितेश शुक्ला सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद अब इन शिकायतों और ग्रामीण मौजूद रहे… अब इन शिकायतों के बाद प्रशासन की जांच पर सबकी निगाहें टिक गई हैं! किसानों ने मांग की है! कि राजस्व रिकॉर्ड की जांच से लेकर भूमि की वर्तमान स्थिति, कथित बंटांकन, नामांतरण और हस्तांतरण की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए…. यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है!तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए… बड़ा सवाल-जमीन का सौदा हुआ, लेकिन किसानों के हक का क्या हुआ? पाराघाट में उठी शिकायतें अब सिर्फ जमीन के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं हैं! 117 एकड़ जमीन की खरीद, खसरा नंबर 170 में कथित बदलाव और करीब 40 किसान परिवारों के रोजगार-पुनर्वास के दावों ने प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि कलेक्टर के समक्ष पहुंची इन शिकायतों पर प्रशासन कितनी गंभीरता से जांच करता है! और जांच में कौन से तथ्य सामने आते हैं! या फिर राजनैतिक रसूख के आगे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है! अगले अंक में चौंकाने वाला खुलासा प्रमाणित दस्तावेजों के साथ

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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