Sun. Nov 8th, 2026

60 बोरी सरकारी चावल की पिकअप ने मचा दिया ‘खलबली’ का राशन, गोदाम से दुकान और दुकान से मंजिल तक कौन कर रहा है चावल का खेल? GPS, स्टॉक और कागज खंगाले तो कहीं ‘काला कारोबार’ की खिचड़ी तो नहीं पक रही?…

बिलासपुर,,, गरीबों के हक में मिलने वाला सरकारी चावल अगर राशन दुकान से निकलकर संदिग्ध तरीके से दूसरी जगह पहुंच रहा है! तो सवाल सिर्फ 50-60 बोरी चावल का नहीं… बल्कि पूरी व्यवस्था की निगरानी का है! गोबरा नवापारा के वार्ड क्रमांक-2 में राशन दुकान के बाहर करीब 50 से 60 बोरी चावल से लदी पिकअप पकड़े जाने के बाद खाद्य विभाग ने चावल जब्त कर जांच शुरु की है! करीब 2 से ढाई टन चावल से भरी गाड़ी आखिर किसके निर्देश पर और किस दस्तावेज के आधार पर निकली थी… इसका जवाब जांच में सामने आना बाकी इसी घटना के बहाने बिलासपुर में लंबे समय से लगाए… जा रहे उन आरोपों की भी जांच जरूरी हो जाती है! जिनमें परिवहन के दौरान सरकारी चावल में हेराफेरी, बोरियां बदलने और चावल को निजी कारोबार तक पहुंचाने की बात कही जाती रही है! इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है!


कथित तौर पर इस तरह के नेटवर्क में ऑटो, पिकअप और बड़े वाहनों के इस्तेमाल के आरोप लगाए जाते हैं! सवाल यह है! कि अगर ऐसा कोई संगठित खेल चल रहा है! तो GPS निगरानी, गोदाम रिकॉर्ड, राशन दुकान का स्टॉक और परिवहन दस्तावेज इसकी जानकारी क्यों नहीं दे रहे?


सबसे गंभीर आरोप यह भी है! कि कुछ स्थानों पर सरकारी चावल को दूसरी बोरियों में पलटकर आगे खपाने की कोशिश होती है! यदि जांच में ऐसा कोई मामला सामने आता है! तो यह केवल राशन दुकान की अनियमितता नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की जवाबदेही का विषय होगा…
बिलासपुर में भी अब जांच का दायरा सिर्फ एक पिकअप तक सीमित रखने के बजाय गोदाम से लेकर राइस मिल और अंतिम उपभोक्ता तक चावल की पूरी आवाजाही तक पहुंचना चाहिए… किसके नाम पर चावल निकला? किस वाहन से गया? GPS लोकेशन क्या कहती है? स्टॉक कितना था? और मंजिल कहां थी? इन सवालों के दस्तावेजी जवाब ही तय करेंगे… कि मामला सामान्य परिवहन का है! या सरकारी चावल की कथित हेराफेरी के किसी बड़े नेटवर्क की कड़ी…

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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