Breaking
29 Sep 2026, Tue

निगम में काम का रेट फिक्स, पार्षद का फोन भी बेअसर, नल से नक्शा, टैक्स से कब्जा तक कथित लेन-देन का खेल… क्लर्क पकड़ा गया तो खुला राज, अब सवाल मोहरा एक था या पूरा सिस्टम ही रेट-कार्ड पर चल रहा?

बिलासपुर,,,,  नगर निगम में रिश्वतखोरी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं! संपदा शाखा के क्लर्क के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद सामने आए एक सर्वे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने निगम की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं! पार्षदों का कहना है! कि आम लोगों के काम बिना पैसे के हो सकते हैं! लेकिन समय पर काम कराने के लिए कथित तौर पर लेन-देन की शिकायतें सामने आती हैं! दावा यहां तक है! कि पार्षदों के फोन लगाने के बाद भी कुछ कर्मचारियों द्वारा हितग्राहियों से पैसे मांगने की शिकायतें आती हैं!


पार्षदों का सर्वे….


नगर निगम में रिश्वतखोरी को लेकर किए गए…. सर्वे में 50 पार्षदों से बातचीत का दावा किया गया है! इनमें कांग्रेस के 17 और भाजपा के 33 पार्षद शामिल बताए गए हैं! कांग्रेस के सभी 17 पार्षदों ने निगम में भ्रष्टाचार की समस्या होने की बात कही, जबकि भाजपा के 33 में से 26 पार्षदों ने भी बिना पैसे काम कराने में परेशानी की बात स्वीकार किए जाने का दावा है! हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और दस्तावेजी पुष्टि जरूरी है!


कौन-कौन से काम सवालों के घेरे में?….


पार्षदों के मुताबिक नल कनेक्शन, टैक्स जमा करने, भवन नक्शा पास कराने, आवास योजना, संपदा शाखा में फाइल आगे बढ़ाने और कब्जे से जुड़े मामलों में लेन-देन की शिकायतें सामने आती हैं!

आरोप है! कि करीब 1200 रुपए के नल कनेक्शन के लिए कुछ मामलों में 2500 रुपए तक मांगने की शिकायतें आईं… वहीं टैक्स निर्धारण को लेकर भी रकम बढ़ाकर बताने और बाद में कथित तौर पर कम रकम में काम करने के आरोप लगाए गए हैं!


कब्जे और भवन शाखा पर भी आरोप…


पार्षदों ने अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं! आरोप है! कि कुछ मामलों में पैसे देने वालों के कब्जे बच जाते हैं! जबकि दूसरे मामलों में कार्रवाई की जाती है! भवन शाखा में नक्शा पास कराने को लेकर भी कथित लेन-देन की शिकायतों का जिक्र किया गया है! इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है!


संपदा शाखा का मामला…


इन तमाम आरोपों के बीच संपदा शाखा में क्लर्क के रिश्वत लेते पकड़े जाने की घटना ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरा दिए हैं! सवाल उठ रहा है! कि अगर एक कर्मचारी पर कार्रवाई होती है! तो क्या पूरा सिस्टम भी जांच के दायरे में आएगा? क्या फाइलों की आवाजाही और अलग-अलग शाखाओं में होने वाले काम की निगरानी की जाएगी?


सभापति का बड़ा बयान….


नगर निगम के सभापति विनोद सोनी ने भी बिना पैसे आम लोगों के काम नहीं होने की बात कही है! उनका आरोप है! कि पकड़ा गया… कर्मचारी केवल मोहरा हो सकता है! और इस बात की जांच होनी चाहिए… कि वह किसके इशारे पर कथित तौर पर पैसे ले रहा था…


महापौर ने कहा सिस्टम सुधरेगा….


वहीं महापौर पूजा विधानी ने कहा है! कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों और विभाग प्रमुखों से चर्चा कर सिस्टम में सुधार किया जाएगा…. जोन कमिश्नरों और विभाग प्रमुखों की बैठक लेकर व्यवस्था को नियमों के मुताबिक संचालित करने पर मंथन करने की बात भी कही गई है!


सबसे बड़ा सवाल….


अब सबसे बड़ा सवाल यही है! कि अगर पार्षदों तक लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही हैं! तो निगम के भीतर शिकायतों की जांच और जवाबदेही का तंत्र कितना प्रभावी है? क्या रिश्वतखोरी की शिकायतों की शाखावार जांच होगी? क्या फाइलों के निपटारे की समय-सीमा तय होगी? और क्या आम आदमी बिना किसी सिफारिश या कथित लेन-देन के अपना काम करा पाएगा?


फिलहाल आरोप गंभीर हैं! और जांच जरूरी है! क्योंकि निगम में अगर काम की कीमत सरकारी शुल्क से ज्यादा कथित लेन-देन तय करने लगे, तो सवाल सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता का बन जाता है!

Author Profile

प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
Latest entries

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed