Breaking
29 Sep 2026, Tue

लक्ष्मीकांत कोका के 10 हजार ने खोल दी संपदा शाखा की संपत्ति की पोल, 25 साल से कुर्सी पर जमे बाबू कोका की दौलत पर सवाल, घर से सामान निकलने की चर्चा, और करोड़ो की प्रॉपटी के चर्चे के बढ़ाई ACB की टेंशन….

बिलासपुर,,,, प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर में नगर निगम के विकास भवन स्थित संपदा शाखा में करीब 25 वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी लक्ष्मीकांत कोका के खिलाफ ACB की कार्रवाई…. के बाद अब उसकी कथित संपत्ति और आय के स्रोतों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं! कर्मचारी को हाल ही में 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद शिकायतकर्ताओं की मांग है! कि जांच को केवल रिश्वत प्रकरण तक सीमित न रखा जाए… बल्कि उसकी चल-अचल संपत्ति और आय के स्रोतों की भी पड़ताल की जाए…

25 साल से एक ही शाखा में पदस्थ रहने पर सवाल…


लक्ष्मीकांत कोका करीब 25 वर्षों से नगर निगम की संपदा शाखा में कार्यरत बताया जा रहा है! इतने लंबे समय तक एक ही शाखा में पदस्थ रहने को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं! शिकायतकर्ताओं का कहना है! कि संपदा शाखा में जमीन, लीज, किराए और अन्य संपत्ति संबंधी कार्यों से जुड़े मामलों में लंबे समय तक काम करने के कारण कर्मचारी की भूमिका और उसके कथित संपर्कों की भी जांच की जानी चाहिए…


10 हजार की रिश्वत के बाद संपत्ति जांच की मांग…


ACB ने कर्मचारी को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा… इसके बाद मांग उठी है! कि रिश्वत प्रकरण के साथ-साथ कर्मचारी की संपत्ति का भी सत्यापन किया जाए… बैंक खाते, जमीन-जायदाद, वाहन, नकदी, निवेश और अन्य चल-अचल संपत्तियों की जानकारी जुटाकर उनकी तुलना ज्ञात आय से किए जाने की मांग की जा रही है!
हालांकि आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप फिलहाल सिद्ध नहीं हुआ है! और इसकी स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है!


ACB कार्रवाई वाले दिन घर में क्या हुआ?…


सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है! कि ACB कार्रवाई वाले दिन कर्मचारी के घर के आसपास कुछ लोगों की संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं… दावा है! कि कुछ लोग कथित तौर पर सोना-चांदी, नकदी और जमीन से जुड़े दस्तावेज लेकर जाते दिखाई दिए…
इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है! यदि संबंधित स्थानों पर CCTV कैमरे लगे हैं! तो जांच एजेंसी फुटेज की जांच कर सकती है! CCTV फुटेज से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में उस दिन घर से कोई सामान या दस्तावेज बाहर ले जाए गए थे… या नहीं…


बेटी की शादी में 25-30 लाख खर्च की चर्चा…


कर्मचारी की बेटी के अक्टूबर में होने वाले विवाह को लेकर भी चर्चाएं… सामने आ रही हैं! दावा किया जा रहा है! कि शादी में करीब 25 से 30 लाख रुपए खर्च होने की बात कही जा रही है! हालांकि खर्च की वास्तविक राशि और उसके स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है!
ऐसे में शिकायतकर्ताओं का सवाल है! कि यदि इतनी बड़ी राशि खर्च की गई है! तो उसका स्रोत क्या है! और क्या यह राशि कर्मचारी की ज्ञात आय से मेल खाती है? इन सवालों का जवाब दस्तावेजी जांच से ही सामने आ सकता है!


करोड़ों की संपत्ति की चर्चा, लेकिन दस्तावेज कहां?…


विभागीय स्तर पर कर्मचारी की कथित करोड़ों की संपत्ति को लेकर चर्चा होने की बात कही जा रही है! लेकिन फिलहाल ऐसी संपत्ति का कोई आधिकारिक दस्तावेज या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है! इसलिए इन चर्चाओं को सत्यापित तथ्य के बजाय जांच का विषय माना जाना चाहिए… यदि ACB या कोई सक्षम जांच एजेंसी संपत्ति की जांच करती है! तो जमीन के दस्तावेज, रजिस्ट्री, बैंक लेन-देन, वाहन और अन्य निवेश की जानकारी से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है!


अस्पताल में भर्ती और जमानत की भी चर्चा….


इधर सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया जा रहा है! कि आरोपी कर्मचारी स्वास्थ्य संबंधी आधार पर अस्पताल में भर्ती होकर जमानत लेने का प्रयास कर सकता है! इसके लिए कथित तौर पर सेटिंग किए जाने की चर्चा भी है! हालांकि अस्पताल में भर्ती होने या जमानत के लिए किसी कथित सेटिंग की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है! इसलिए इस दावे को भी केवल सूत्रों की चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए…


सबसे बड़ा सवाल : रिश्वत से आगे बढ़ेगी जांच?…


ACB की कार्रवाई के बाद अब बड़ा सवाल यही है! कि क्या जांच एजेंसी रिश्वत प्रकरण के साथ कर्मचारी की कथित आय से अधिक संपत्ति के पहलू की भी जांच करेगी? यदि जांच होती है! तो करीब 25 वर्षों की सेवा अवधि में अर्जित संपत्ति और आय के स्रोत का मिलान महत्वपूर्ण होगा.. फिलहाल मामला ACB की कार्रवाई और उससे जुड़े आरोपों तक सीमित है! संपत्ति से संबंधित आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी….


न्यूज बास्केट की स्पष्टता:….

इस खबर में संपत्ति, घर की गतिविधियों, विवाह खर्च और जमानत से जुड़ी बातें आरोप, मांग, चर्चा और सूत्रों के दावे के रूप में प्रस्तुत की गई हैं! इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है! संबंधित कर्मचारी अथवा उनके प्रतिनिधि का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा….

Author Profile

प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
Latest entries

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed