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तिफरा में जमीन की जंग, बच्चों के आशियाने के लिए बचाई पैतृक जमीन की फेंसिंग दो बार उखाड़ने का आरोप, रामा वर्ल्ड के पार्टनर संजय अग्रवाल पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल, सिरगिट्टी पुलिस पर भी रिपोर्ट नहीं लिखने का आरोप, अब कलेक्टर के दरबार में न्याय की गुहार…

बिलासपुर,,,, तिफरा में पैतृक जमीन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है! बस स्टैंड मंडपम से सेक्टर-डी रोड स्थित जमीन पर फेंसिंग तार लगाकर सुरक्षा करने के बावजूद उसे दो बार तोड़े जाने का आरोप सामने आया है! मामले में जमीन मालिक ने रामा रियल स्टेट (रामा वर्ल्ड) के भागीदार संजय अग्रवाल के खिलाफ शिकायत करते हुए कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है!

साथ ही जमीन पर कथित अवैध कब्जे की कोशिश रोकने और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है!


पैतृक जमीन पर बच्चों के लिए सुरक्षित रखी है भूमि…


शिकायतकर्ता के मुताबिक वह तिफरा बिलासपुर का स्थायी निवासी है! और उसके पूर्वज खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते आए हैं! बस स्टैंड मंडपम से सेक्टर-डी रोड तिफरा में खसरा नंबर 1278/3 की पैतृक जमीन है! इसमें से आधी भूमि राज्य शासन द्वारा विधिवत अधिग्रहित की जा चुकी है! जबकि शेष जमीन को उसने अपने बच्चों के मकान निर्माण के लिए सुरक्षित रखा है!


पहली बार फेंसिंग तोड़ने का आरोप, थाने में नहीं हुई सुनवाई…


शिकायत में बताया गया है! कि 18 अक्टूबर 2026 को उसने अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए फेंसिंग तार लगवाया था… आरोप है! कि 23 अक्टूबर की रात संजय अग्रवाल ने फेंसिंग को तोड़ दिया… इसकी शिकायत लेकर जब वह सिरगिट्टी थाने पहुंचा तो कथित तौर पर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक उसे और उसके परिवार को बैठाए रखा गया… लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई…


दोबारा घेराबंदी की, फिर तोड़ दिए तार…


शिकायतकर्ता के अनुसार 2 नवंबर को उसने दोबारा फेंसिंग कर जमीन को सुरक्षित किया… लेकिन उसी रात फिर तार तोड़ दिए गए… 3 नवंबर की सुबह मौके पर पहुंचने पर उसे इसकी जानकारी मिली… इसके बाद उसने पुलिस स्तर पर सुनवाई नहीं होने का हवाला देते हुए कलेक्टर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की…


कलेक्टर से कार्रवाई और जमीन की सुरक्षा की मांग…


शिकायतकर्ता ने संजय अग्रवाल के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने, जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा रोकने और अपनी पैतृक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है! फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं! मामले में संबंधित पक्ष का जवाब और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी…

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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