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2 Oct 2026, Fri

तखतपुर थाने में कानून की किताब बंद, समझौते का हिसाब चालू? गंभीर घायल अस्पताल में, ट्रक तीन दिन थाने में खड़ा, फिर 50 हजार में मामला निपटाने का आरोप! गाड़ी छोड़ने के लिए भी रकम मांगने का दावा, साहब अब जांच करेंगे या शिकायत का इंतजार?

बिलासपुर,,,, न्यायधानी बिलासपुर जिले के तखतपुर थाने में सड़क हादसे के बाद कथित समझौते का मामला सामने आया है! आरोप है!कि गंभीर रूप से घायल युवक के मामले में थाने में ही करीब 50 हजार रुपये में समझौता कराकर बिना अपराध दर्ज किए दोनों पक्षों को रवाना कर दिया गया…. वहीं, ट्रक चालक ने वाहन छोड़ने के एवज में पुलिसकर्मियों द्वारा अलग से रकम मांगने का आरोप लगाया है!हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है! मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और थाने के रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं!

हादसे में युवक गंभीर, निजी अस्पताल में इलाज जारी….

जानकारी के मुताबिक, ट्रक और बाइक की टक्कर में बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया… ट्रक चालक का दावा है! कि वह सड़क खराब होने के कारण अपनी साइड में धीमी गति से वाहन चला रहा था, तभी सामने से गलत दिशा में तेज गति से आ रही बाइक ट्रक से टकरा गई। चालक के अनुसार, वह मौके से भागने के बजाय अपने हेल्पर की मदद से घायल को निजी अस्पताल लेकर पहुंचा और पुलिस को सूचना देने के बाद ट्रक थाने में खड़ा कर दिया…


तीन दिन थाने में खड़ा रहा ट्रक, 50 हजार में समझौते का दावा
ट्रक चालक का आरोप है कि उसका वाहन तीन दिन से अधिक समय तक थाने में खड़ा रहा। बाद में दोनों पक्षों के बीच करीब 50 हजार रुपये में समझौता कराया गया। चालक के मुताबिक, घायल पक्ष को नकद और ऑनलाइन माध्यम से भुगतान किया गया…

उसने ट्रक को महाराष्ट्र ले जाने के लिए छोड़ने के एवज में भी अलग से रकम मांगे जाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, घायल युवक के परिजनों का दावा है कि वे रिपोर्ट दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन थाने में समझौते के लिए दबाव बनाया गया। परिजनों के अनुसार, युवक के इलाज में अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और उसका उपचार जारी है।


थाना प्रभारी के बयान से उठे सवाल…


मामले में तखतपुर थाना प्रभारी ने कहा कि दोनों पक्ष रिपोर्ट दर्ज नहीं कराना चाहते थे और आपसी सहमति से मामला समाप्त किया गया। हालांकि, शुरुआती बातचीत में उन्होंने घटना की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई, जबकि बाद में घटना और समझौते की जानकारी होने की बात कही। थाने में मौजूद कर्मचारियों ने भी घटना से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी नहीं होने की बात कही।


अब रिकॉर्ड और CCTV की जांच जरूरी….


इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि ट्रक थाने में कब पहुंचा और किस आधार पर छोड़ा गया? क्या वाहन की जब्ती हुई थी? क्या रोजनामचा में इसकी एंट्री दर्ज है? क्या वाहन छोड़ने का कोई लिखित आदेश मौजूद है? यदि थाने में CCTV कैमरे लगे हैं, तो संबंधित अवधि की फुटेज से भी घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती है।

बड़ा सवाल: शिकायत का इंतजार करेंगे अधिकारी या खुद लेंगे संज्ञान?…


अब देखना होगा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मामले में स्वतः संज्ञान लेकर थाने के रोजनामचा, वाहन संबंधी दस्तावेजों, CCTV फुटेज और कथित लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। फिलहाल, आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन सवाल साफ है—यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ, तो रिकॉर्ड सामने आने में परेशानी क्यों होनी चाहिए?

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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