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28 Sep 2026, Mon

एसडीएम ने लगाई रोक, रजिस्ट्री ने खोल दिया रास्ता, उप पंजीयक बोले—हुक्म पढ़िए, हमें कौन रोक सकता है? घुरू में प्रतिबंध के बावजूद जमीन के सात टुकड़ों का नामांतरण… तखतपुर में नियमों की फाइल घूमती रही, प्लाटिंग का खेल चलता रहा…

बिलासपुर,,, तखतपुर अनुविभाग में कथित अवैध प्लाटिंग और प्रतिबंधित जमीनों की रजिस्ट्री को लेकर राजस्व और पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं! आरोप है! कि एसडीएम न्यायालय द्वारा जमीन के विक्रय, नामांतरण और निर्माण पर रोक लगाए जाने के बावजूद संबंधित जमीनों की रजिस्ट्री और नामांतरण हो रहे हैं!


घुरू का मामला सामने आया….


सकरी तहसील के ग्राम घुरू स्थित खसरा नंबर 109/33 में करीब 10,500 वर्गफीट भूमि दर्ज थी… उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार तखतपुर एसडीएम ने 22 अप्रैल 2026 को आदेश क्रमांक 426/अवि-अवा-1/2026 जारी कर संबंधित भूमि के विक्रय, नामांतरण और निर्माण पर आगामी आदेश तक रोक लगाई थी…. इसके बावजूद उक्त भूमि के सात टुकड़े किए जाने और उनके नामांतरण का मामला सामने आया है! इससे एसडीएम के आदेश के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं!


रजिस्ट्री और कैफियत पर भी सवाल…


राजस्व रिकॉर्ड में प्रतिबंध की जानकारी कैफियत में दर्ज होने की बात सामने आई है! आरोप है! कि बाद में रजिस्ट्री के दौरान संबंधित खसरों के कैफियत कॉलम में प्रतिबंध की स्थिति बदल गई…. हालांकि इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों का स्पष्ट आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है!


उप पंजीयक ने शासन के आदेश का दिया हवाला….


उप पंजीयक आशीष तिवारी ने अधिकृत रूप से अपना पक्ष देने से इनकार किया… लेकिन 4 फरवरी 2026 को वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा कलेक्टरों को जारी आदेश का हवाला दिया… आदेश में कहा गया है! कि नियमों के विपरीत लगाए गए स्थानीय प्रतिबंधों की सूचना महानिरीक्षक पंजीयक को दी जानी चाहिए… और सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी के स्पष्ट आदेश के बिना पंजीयन से इंकार नहीं किया जा सकता… इसी आदेश को लेकर अब राजस्व और पंजीयन विभाग की अधिकार सीमा पर बहस शुरू हो गई है!


मेड़ा और सैदा में भी मामले…


ग्राम मेड़ा में खसरा नंबर 154/1 की करीब 1.17 एकड़ भूमि पर एसडीएम की रोक के बावजूद रजिस्ट्री और बाद में नामांतरण का मामला सामने आया… सकरी तहसीलदार ने इसे चूक बताते हुए प्रकरण को रिव्यू में लेने की बात कही है! वहीं सैदा में घास मद की जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण का मामला भी जांच के दायरे में है!
अब सवाल यह है! कि यदि राजस्व न्यायालय की रोक प्रभावी थी… तो रजिस्ट्री और नामांतरण कैसे हुए? साथ ही कथित प्लाटिंग में टीएनसीपी और रेरा नियमों का पालन हुआ या नहीं…. इसकी जांच भी जरूरी है! मामले में दस्तावेजी जांच और संबंधित अधिकारियों के स्पष्ट जवाब के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी….

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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