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7 Oct 2026, Wed

सांडों का दंगल, सरकारों का मंगल, बच्चा गोद में हो या सड़क पर निकलना हो, कब कहां से सांड पटक दे कोई ठिकाना नहीं, स्ट्रीट लाइट गुल, सड़कें बेहाल, मवेशियों का कब्जा बरकरार, ऐला कइथे छत्तीसगढ़… दो-दो सरकारें आईं, पर सांडों के आतंक से जनता को मुक्ति कब मिलही भैया…

00 दो-दो सरकारे आई पर मवेशियों का आज तक नही किया जा सका उचित प्रबंधन…
00 तब भी सड़को पर था मवेशियों का जमावड़ा व दंगल और आज भी है!…
00 चोचले और दिखावे से नही बदलेगे हालात उठाने होंगे ठोस कदम…

बिलासपुर,,,, छत्तीसगढ़ की राजधानी में आमआदमी कितना सुरक्षित है! आप इन तस्वीरों में खुद देख लीजिए… ये तस्वीरें रायपुर के पंडित दीनदयाल नगर सेक्टर-2 की बताई जा रही… जहा सांड के हमले का खौफनाक वीडियो सामने आया है! CCTV फुटेज में दिखाई दे रहा है! कि कैसे गोद में बच्चे को लेकर जा रहे बुजुर्ग पर अचानक पीछे से सांड उन्हें उठाकर पटक रहा…. वे कैसे बच्चे समेत सड़क पर गिर रहे…. और आक्रामक सांड बार बार जानलेवा हमला कर रहा… इसी दौरान घर से निकली महिला पहले बच्चे को सुरक्षित उठाकर घर के अंदर ले जाती है! फिर बुजुर्ग को बचाने सामने आती है! लेकिन दर्द से कराह रहा बुजुर्ग वही निढाल होकर गिर जाता है!


ये तस्वीर केवल रायपुर की नही बल्कि आलओवर छत्तीसगढ़ की है! बिलासपुर में भी सांडों का सरेराह दंगल आम है! जो सरकार और स्थानीय प्रशासन के दावों की सच्चाई है!
करोड़ो की ठप स्ट्रीट लाइटे, अंधेरे में डूबी गड्ढेदार बदहाल उबड़ खाबड़ सड़के और सड़कों पर पसरे मवेशी का ऐला कइथे छत्तीसगढ़… हाईकोर्ट भी फटकार लगा चुका, सीएम और स्थानीय प्रशासन चेतावनी दे चुके पर सड़को पर दंगल करते और पसरे मवेशियों के उचित प्रबंधन के नाम पर केवल हवाबाजी होती रही.. जिससे ये साबोट हो गया… कि इस लाइलाज व्याधि का उपचार शासन- प्रशासन के बस का है! ही नही… इसके लिए पब्लिक को ही कुछ ठोस पहल करनी होगी…?

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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