सांडों का दंगल, सरकारों का मंगल, बच्चा गोद में हो या सड़क पर निकलना हो, कब कहां से सांड पटक दे कोई ठिकाना नहीं, स्ट्रीट लाइट गुल, सड़कें बेहाल, मवेशियों का कब्जा बरकरार, ऐला कइथे छत्तीसगढ़… दो-दो सरकारें आईं, पर सांडों के आतंक से जनता को मुक्ति कब मिलही भैया…
00 दो-दो सरकारे आई पर मवेशियों का आज तक नही किया जा सका उचित प्रबंधन…00...
