
बिलासपुर,,,, शहर में भीषण गर्मी के बीच बिजली की आंख-मिचौनी और स्मार्ट मीटर से आ रहे भारी-भरकम बिलों ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है! जहां एक तरफ दिन में कई बार बिजली गुल हो रही है! वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं के घर डबल और रिकॉर्ड तोड़ बिल पहुंच रहे हैं! बिलासपुर विद्युत वितरण कंपनी की तरफ से स्मार्ट मीटर और चिप सिस्टम तो लगा दिए गए हैं! लेकिन लोगों को न तो स्थायी बिजली मिल रही है! और न ही सही बिल उपभोक्ता कह रहे हैं! कि कांग्रेस शासन में बिजली बिल आधा आता था! अब न बिजली है! और न राहत, ऊपर से डबल बिल की मार झेलनी पड़ रही है! शहर के कई इलाकों में जिन घरों का बिल पहले 1000 से 1200 रुपये आता था! अब वहीं बिल 2500 से लेकर 8000 रुपये तक पहुंच गया है! लोग सवाल कर रहे हैं! कि जब उन्होंने न तो कोई नया उपकरण लगाया, न ही बिजली की खपत बढ़ाई, तो फिर इतना ज्यादा बिल क्यों आ रहा है? क्या उनके घरों में फैक्ट्री चल रही है? इतना ही नहीं, बिजली कभी आधी रात को, तो कभी सुबह तड़के 4-5 बजे कट जाती है! जिससे लोगों की नींद पूरी नहीं हो रही। इसका असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है! और अब इलाज और दवाइयों पर भी खर्च बढ़ गया है! जनता का कहना है! कि सरकार को स्मार्ट मीटर के नाम पर सिर्फ तकनीक नहीं, सुविधाएं भी देनी चाहिए! सिर्फ मीटर बदलने से समस्याएं हल नहीं होंगी! लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही बिजली संकट और गलत बिलों की समस्या का समाधान किया जाएगा!
Author Profile
Latest entries
Uncategorized2026.09.08मोपका की बेशकीमती जमीन पर फिर ‘केडिया’ का दावा, रिकॉर्ड में निगम की, जमीन पर खम्भे गड़े… हाईकोर्ट के आदेश पर खुला सीमांकन का पिटारा, निगम-राजस्व टीम ने नापी जमीन, अब रिपोर्ट बताएगी असली मालिक कौन?
Uncategorized2026.09.08श्रीराम केयर में इलाज के बाद ‘कचरे’ का खेल! सार्वजनिक जगह पर मेडिकल वेस्ट और एक्सपायरी दवाएं डंप, निगम की नजर पड़ी तो अस्पताल पर ठोंका ₹30 हजार जुर्माना, अब चेतावनी, दोबारा गलती हुई तो कार्रवाई और तगड़ी…
Uncategorized2026.09.08प्रदीप आर्य की ‘डिक्की चेकिंग’ ने खोला नशे का राज, बिरकोना रोड पर कार रोकते ही निकली ऑनरेक्स की 520 नग खेप, दो आरोपी दबोचे गए, 1.04 लाख का सिरप जब्त; दो सप्लायर अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर…
Uncategorized2026.09.08सेंदरी के जमीन खेल में पटवारी पर मेहरबानी क्यों? 19 अक्टूबर का डेथ सर्टिफिकेट, 16 अक्टूबर का फौती प्रतिवेदन, एक माह से जांच ठंडी, कार्रवाई गायब… रसूख भारी या सिस्टम बेबस?
