बिलासपुर,,,, जिले में शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन और बहाली को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है! जय गणेश प्राथमिक उपभोक्ता भंडार और आजाद महिला स्व सहायता समूह को दोबारा संचालन की अनुमति मिलने के बाद अब बहाली की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं! आरोप है! कि दोनों दुकानों से जुड़े मामलों में पूर्व में गंभीर अनियमितताओं और राशन कार्डों में फर्जी नाम जोड़े जाने के आरोप सामने आ चुके हैं! इसके बावजूद पुनः संचालन की अनुमति दिए जाने से प्रशासनिक प्रक्रिया और विभागीय पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं!
जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में दोनों उचित मूल्य दुकानों के खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों के चलते कार्रवाई की गई थी…. बाद में संबंधित दुकानों को निरस्त किए…. जाने के बाद मामले को लेकर एडीएम न्यायालय में अपील की गई… संबंधित पक्षों का कहना है! कि एडीएम न्यायालय के आदेश के आधार पर दुकानों को पुनः संचालन की अनुमति मिली है! हालांकि, अब सवाल यह उठ रहा है! कि बहाली की प्रक्रिया में विभागीय नियमों और राजस्व वसूली की कार्रवाई का कितना पालन किया गया….
2022 की जांच में सामने आया था फर्जी नाम जोड़ने का मामला….
बताया जा रहा है! कि दिसंबर 2022 में हुई जांच के दौरान बिलासपुर में राशन कार्डों से जुड़े एक बड़े मामले का खुलासा हुआ था…. इस मामले में 1,877 फर्जी नाम राशन कार्डों में जोड़े जाने के आरोप सामने आए थे…. आरोपों के आधार पर आजाद महिला स्व सहायता समूह से जुड़े संचालक के पुत्र सद्दाम खान के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई थी…. वहीं, जय गणेश प्राथमिक उपभोक्ता भंडार से जुड़े फिरोज खान पर भी दुकान संचालन में अनियमितता के आरोपों को लेकर कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई थी…. अब आरोप यह है! कि कार्रवाई के बाद भी संबंधित परिवार के लोगों की खाद्य विभाग में सक्रियता और दुकान संचालन में दोबारा भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं! हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है!
बिना आरआरसी कार्रवाई पूरी हुए कैसे बहाल हुई दुकान?….
मामले में सबसे बड़ा सवाल राजस्व वसूली प्रमाण पत्र (RRC) की कार्रवाई को लेकर उठाया जा रहा है! विभागीय प्रक्रिया के जानकारों का कहना है! कि यदि किसी उचित मूल्य दुकान में शासकीय राशन की हेराफेरी या आर्थिक अनियमितता सामने आती है! तो नियमानुसार संबंधित राशि की वसूली की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है!
ऐसे में सवाल यह है! कि क्या संबंधित दुकानों के मामले में RRC की कार्रवाई पूरी हुई थी?…. यदि नहीं, तो बहाली का आधार क्या रहा? तहसील स्तर पर आवश्यक पत्राचार और राजस्व वसूली की प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है!
संचालन की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल….
बहाली के बाद दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी फिर से पुराने लोगों को सौंपे जाने की चर्चाओं ने भी मामले को और गरमा दिया है! आरोप है! कि जय गणेश प्राथमिक उपभोक्ता भंडार में फिरोज और आजाद महिला स्व सहायता समूह में सद्दाम को दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है! इसे लेकर स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं!
खाद्य विभाग की भूमिका पर भी उठ रही उंगली…
मामले को लेकर सबसे गंभीर सवाल अब खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे हैं! आरोप लगाए जा रहे हैं! कि संबंधित लोगों की विभागीय अधिकारियों और निरीक्षकों से कथित नजदीकियों के चलते उन्हें दोबारा दुकान संचालन का अवसर मिला…. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है! और विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है!
अब प्रशासन से जांच और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग….
पूरे मामले को लेकर मांग उठ रही है! कि प्रशासन बहाली से जुड़े सभी दस्तावेज, एडीएम न्यायालय के आदेश, RRC की स्थिति और विभागीय कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराए…. यदि नियमों की अनदेखी या प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है! तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए…. अब देखने वाली बात यह होगी कि 1,877 फर्जी नामों और राशन वितरण में कथित अनियमितताओं से जुड़े पुराने मामलों के बाद दोबारा मिली दुकान संचालन की अनुमति पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है! और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है!
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