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4 Feb 2026, Wed

बिलासपुर में भूमाफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से 3 करोड़ का घोटाला, 20 साल से रह रहे भूस्वामियों पर संकट…

बिलासपुर,,,  न्यायधानी बिलासपुर में भूमाफिया और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है! इस घोटाले में भूमाफियाओं ने सरकारी भूमि का अवैध तरीके से सौदा किया है! और 3 करोड़ रुपये की राशि का लेन-देन किया है! आरोप है! कि इन भूमाफियाओं के साथ मिलकर राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों ने मिलकर इस अवैध प्लॉटिंग को अंजाम दिया!  इस घोटाले का शिकार 20 वर्षों से मकान बनाकर रह रहे भूस्वामियों पर संकट का दौर आ गया है!

भूमाफिया और अधिकारियों की मिलीभगत

साईं विहार कॉलोनी, जो तिफरा स्थित खसरा क्रमांक 193 पर बनी है! यहां की शासकीय धरसा भूमि का भूमाफियाओं ने 3 करोड़ रुपये में सौदा किया है! इसमें भूमाफिया रमनदीप सलूजा, अजीत पटेल और मनोज गुप्ता का नाम सामने आया है! आरोप है! कि इन भूमाफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर इस भूमि की रजिस्ट्री कराई, जबकि नगर निगम ने इसके ऊपर रोक भी लगा दी थी! तहसीलदार, आरआई और पटवारी द्वारा लाखों रुपये की रिश्वत लेने के बाद इस घोटाले को अंजाम दिया गया!

भूस्वामियों को बेदखल करने की कोशिश

20 साल से अपने मकान में रह रहे नागरिकों के लिए अब संकट खड़ा हो गया है! इन भूस्वामियों के मकानों को अवैध कब्जा बताकर उन्हें बेदखल करने की कोशिश की जा रही है! आरोप है! कि भूमाफियाओं के इशारे पर राजस्व अधिकारियों ने अवैध सीमांकन किया था! जिसे बाद में अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा निरस्त कर दिया गया! इसके बावजूद अधिकारियों ने फिर से अवैध सीमांकन कराकर इन भूस्वामियों को अतिक्रमणकारी घोषित कर धमकी भरे नोटिस भेजे हैं!

शासन की ओर से कार्रवाई की उम्मीदें

स्थानीय जनप्रतिनिधियों, भूस्वामियों और साईं विहार विकास समिति ने कलेक्टर, कमिश्नर और महापौर को इस मामले में लिखित शिकायत दी है। भूस्वामियों का आरोप है! कि जब नगर निगम ने मकानों के नक्शे को पास किया और संपत्ति कर भी लिया, तो अब उन्हें कैसे अवैध कब्जा ठहराया जा सकता है? इसके अलावा, घुरु स्थित खसरा क्रमांक 304/1 और 304/2 की शासकीय भूमि को भूमाफिया ने अवैध रूप से बेच दिया, जबकि निगम ने रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद भूमि का रजिस्ट्रेशन और नामांतरण कैसे हुआ, यह सवाल उठता है!

निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय भूस्वामियों का कहना है कि यदि सीमांकन भूमाफियाओं के पक्ष में नहीं होता, तो वे कानूनी दांव-पेंच का सहारा लेते। अब सवाल उठता है कि जब निगम ने रजिस्ट्री पर रोक लगाई थी, तो फिर कैसे शासकीय भूमि का रजिस्ट्री और नामांतरण हुआ? इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है, ताकि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।

भूस्वामियों का संघर्ष जारी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। वर्षों की पूंजी लगाकर घर बनाकर रह रहे भूस्वामी अब न्याय के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार हैं। वे कलेक्टर, कमिश्नर और महापौर से यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या वे भूमाफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करेंगे और दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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