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3 Feb 2026, Tue

छत्तीसगढ़ के 3 मेडिकल कॉलेजों पर 30 लाख का जुर्माना, छात्रों से ज्यादा फीस वसूलने पर होगी मान्यता रद्द..

रायपुर-छत्तीसगढ़,,, के तीन निजी मेडिकल कॉलेजों पर तीस लाख का जुर्माना लगाया गया है! इसके साथ ही राज्य प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति ने छात्रों से ली गई! ज्यादा राशि एक माह में सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं! तय समय में राशि जमा न करने पर शासन ने मेडिकल कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने की अनुशंसा भी की है! एक माह में राशि लौटाने के निर्देश दिए गए हैं! वर्ना उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी!
रायपुर के श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) व भिलाई के शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, जुनवानी में एमबीबीएस, एमडीएमएस पाठ्यक्रमों के संचालन में ट्रांसपोर्ट, हॉस्टल और मेस के नाम पर छात्रों से ज्यादा राशि लिए जाने की शिकायत समिति को मिली थी! जांच में शिकायत सही मिलने पर दस-दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है!

जानकारी के अनुसार श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ट्रांसपोर्टेशन मद में 2.50 लाख रुपये ले रहा है! जबकि वास्तविक राशि 4,635 रुपये है! हॉस्टल मद में 53,337 रुपये की जगह 2.46 लाख तथा मेस चार्ज 51,015 की जगह 56,700 रुपये वसूला जा रहा है! प्रत्येक छात्र से 4,43,713 रुपये अधिक राशि ली जा रही हैं!

श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस मोवा तीनों मद में 5.50 लाख रुपये ले रहा था! यहां ट्रांसपोर्टेशन मद की वास्तविक राशि 13,719 रुपये, हॉस्टल चार्ज 50,583 तथा मेस चार्ज 27,476 रुपये है! प्रत्येक छात्र से 4,58,222 रुपये ज्यादा वसूला जा रहा है!

रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, भानसोज की ओर से तीनों मद में 5.50 लाख रुपये लिए जा रहे हैं! जबकि ट्रांसपोर्टेशन मद में वास्तविक राशि 13,384, हास्टल चार्ज 37,748 तथा मेस चार्ज 45,275 रुपये है! 4,53,593 रुपये अधिक राशि छात्रों से ली जा रही है! प्रवेश तथा फीस नियामक समिति के अध्यक्ष प्रभात कुमार शास्त्री के अनुसार छात्रों से अत्यधिक राशि लेने की शिकायतें मिली थी!

खातों के विवरण की जानकारी मांगी गई थी! समिति ने पाया कि तीनों ही कॉलेज ट्रांसपोर्ट, हॉस्टल और मेस ‘न लाभ-न हानि’ के रूप में ही संचालित कर सकते हैं! छात्रों से वास्तविक खर्च को ही लेने का अधिकार है! लेकिन मनमानी राशि वसूली जा रही है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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