
बिलासपुर,,, कलेक्टर और एसडीएम आदेश को ठेंगा दिखाकर बेलगाम घूरू पटवारी ने जानकारियों को छिपाकर नामांतरण खेल को अंजाम दिया है! मजेदार बात है!कि एक तहसीलदार ने हर बार प्रतिवेदन और एसडीएम कोर्ट का हवाला देकर नामांतरण करने से इंकार किया! तो दूसरे तहसीलदार ने नामांतरण कर दिया! मजेदार बात यह है! कि इसमें पटवारी ने जानबूझकर दूसरे तहसीलदार से एसडीएम आदेश की जानकारी को छिपाकर रखा! और प्रतिवेदन भी नहीं दिया! दरअसल घूरू पटवारी ने भूमाफियों से मिलकर तहसीलदार को ना केवल बेवकूफ बनाया! बल्कि वरिष्ठ अधिकारी के आदेश को ठेंगा भी दिखाया! बताया तो यह भी जा रहा है! इस खेल में दूसरा तहसीलदार भी शामिल है!
मामला घुूरू का है! जैसा की मालूम है! कि घुूरू में अवैध प्लाटिंग का खेल कई सालों से बेखौफ चल रहा है! खेल में पटवारियों की भूमिका हमेशा से अहम् रहा है! लगातार मिल रही शिकायतों और रेरा समेत टीएनसी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शासन ने अनुशासन का डंडा चलाया! कलेक्टर आदेश पर तखतपुर के तात्कालीन एसडीएम ने कुछ चुनिंदा खसरों के खिलाफ स्थगन आदेश जारी किया! तत्काल प्रभाव से 91/3,92/3,94/2, और 95 /2 को अवैध प्लाटिंग बताकर साल 2021 में विक्रय और नामांतरण पर रोक लगा दिया! रोक साल 2025 तक रखा! लेकिन 11 अप्रैल 2025 को पुराने तहसीलदार के हटते ही नए तहसीलदार ने कमाण्ड संभाला! प्रतिबंधित जमीन के नामांतरण पर मुहर लगा दिया! इतना ही नहीं पटवारी के प्रभाव में आकर बिना जांच पड़ताल किए नए तहसीलदार ने रोके गए कमोबेश आधा दर्जन प्लाट का नामांतरण कर दिया!
पटवारी के साथ तहसीलदार की भूमिका भी संदिग्ध
बताया जा रहा है! कि खेल में स्थगन आदेश होने के बाद भी भू-माफियों ने घुूरू पटवारी से बड़ा सौदा किया! पटवारी प्रतिवेदन और एसडीएम के स्थगन आदेश को छिपाकर नामांतरण कराया है! छानबीन के दौरान जानकारी मिली कि साल 2021 में जारी एसडीएम स्थगन आदेश के बाद तत्कालीन सकरी तहसीलदार ने हर बार आदेश का हवाला देकर ना केवल नामांतरण से इंकार किया बल्कि पटवारी को समझाया भी बावजूद इसके घूरू पटवारी मनमोहन सिदार अपनी आदतों से बाज नहीं आए! नए तहसीलदार के सामने स्थगन आदेश की जानकारी छिपाकर 91/3,92/3,94/2, और 95 /2 के विक्रय और नामांतरण पर 11 अप्रैल 2025 को मुहर लगवा लिया! बताया तो यह भी जा रहा है! कि खेल में नए तहसीलदार भी शामिल हैं!
पटवारी ने जानकारी को छिपाया
नाम नहीं छापने की शर्त पर विभागीय कर्मचारी ने बताया कि मनमोहन सिदार ने नए तहसीलदार के सामने ना तो प्रतिवेदन पेश किया! और ना ही जानकारी दिया कि खसरे पर एसडीएम ने रोक लगाया है! दरअसल पवटारी ने भू-माफियों का सहयोग करते हुए अधूरी जानकारी पेश किया! तहसीलदार ने बिना किसी सवाल के जमीन का नामांतरण भी कर दिया! एक कर्मचारी ने तो यह भी बताया कि मामले में नए तहसीलदार की भी भूमिका संदिग्ध है!
सरकारी दस्तावेज के साथ खिलवाड़
विभागीय कर्मचारी ने जानकारी दिया कि नामांतरण के समय पटवारी की जिम्मेदारी बनती है! कि अधिकारी को जानकारी दे! लेकिन मनमोहन सिदार ने ऐसा नहीं किया! जानकारी छिपाकर रोके गए सभी चारो खशरा 91/3, 92/3, 94/2, और 95 /2 के विक्रय और नामांतरण पर 11 अप्रेल को मुहर लगवा लिया! जबकि आज तक एसडीएम का स्थगन आदेश जिंदा है!
दर्ज होना चाहिए एफआईआर
विभागीय लोगों ने बताया कि मामले में छानबीन के बाद पटवारी के खिलाफ अपराध दर्ज होना चाहिए! पटवार ने एक नहीं बल्कि चार प्रतिबंधित खसरा का नामांतरण कराया है! इसमें एसडीएम को अंदेरे में रखकर बड़ा खेल किया है! उम्मीद है! कि कलेक्टर अवनीश शरण जाते जाते कार्रवाई करें..जांच का आदेश दे सकते हैं!
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