
बिलासपुर,,,, बिलासपुर जिलें से एक चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है! यहां स्वामी विवेकानंद अस्पताल पर मरीजों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं! आरोप ऐसे हैं! जिन पर किसी को भी यकीन करना मुश्किल होगा… लेकिन पीड़ितों का कहना है! कि यह सब उनके साथ हुआ है! और उन्होंने इसकी पूरी जानकारी प्रशासन को देने की बात भी कही है!


पूरा मामला बिलासपुर के व्यापार विहार स्थित स्वामी विवेकानंद अस्पताल का है! ग्रामीणों का कहना है! कि उनके रिश्तेदार की तबीयत खराब होने पर उसे कोरबा के 100 बिस्तर अस्पताल में भर्ती कराया गया था! वहां डॉक्टरों ने मरीज को बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर सिम्स अस्पताल रेफर किया! लेकिन यहीं से शुरू हुआ पूरा खेल पीड़ितों के अनुसार, एंबुलेंस चालक ने उन्हें सिम्स अस्पताल ले जाने के बजाय सीधे स्वामी विवेकानंद अस्पताल पहुंचा दिया!
ग्रामीणों का कहना है! कि एंबुलेंस के ड्राइवर ने उन्हें बताया कि यह भी सरकारी अस्पताल है! इसी भरोसे में मरीज के परिजन ने इलाज शुरू करा दिया! लेकिन इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने बार-बार पैसे जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया!

जब मरीजों ने आयुष्मान कार्ड दिखाकर उपचार की बात कही तो अस्पताल संचालक ने साफ कह दिया कि यहां आयुष्मान कार्ड नहीं चलता! इससे परिजन बुरी तरह परेशान हो गए!

किसी ने अपना घर गिरवी रखा… तो किसी ने अपना खेत बेच दिया… सिर्फ इसलिए कि मरीज का इलाज चल सके और अस्पताल के बिल चुकाया जा सकें! पीड़ितों का कहना है!

कि अस्पताल प्रबंधन लगातार पैसे की मांग करता रहा और उन्होंने मजबूरी में रकम दी! लेकिन जब इस मामले पर अस्पताल से बात करने की कोशिश की गई! तो प्रबंधन ने अपना पक्ष रखने से ही इंकार कर दिया!
अब बड़ा सवाल यह है! कि क्या वाकई स्वामी विवेकानंद अस्पताल में आयुष्मान कार्ड नहीं चलता? और दूसरा, सबसे बड़ा सवाल कोरबा के सरकारी 100 बिस्तर अस्पताल और बिलासपुर के निजी अस्पताल के बीच आखिर कैसी सेटिंग है! कि एंबुलेंस चालक मरीज को सरकारी अस्पताल छोड़कर निजी अस्पताल में भर्ती करा देता है? क्या इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन और एंबुलेंस चालक पर कार्रवाई होगी या फिर सबकुछ पहले की तरह चलता रहेगा? गरीब मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचना चाहते हैं! लेकिन एंबुलेंस चालकों की मनमानी के कारण उन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कर दिया जाता है! यह न सिर्फ गंभीर लापरवाही है! बल्कि गरीब लोगों के साथ सीधा अन्याय है! अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है! और क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाता है या नहीं…?

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