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28 Apr 2026, Tue

खनिज माफिया की खटाखट, कार्रवाई बस ‘नाटक’: तीन दिन में 11 गाड़ियां जब्त, सैकड़ों फरार; अरपा की रेत गायब, पहाड़ खोखले… लोग बोले—जुर्माने का खेल बंद करो, राजसात करो तभी बचेगी नदी-पहाड़ और पठार…


00 खटाखट के खेल से नही बचेंगे नदी, पहाड़, पठार…

00 पूरी नदी खाली हो गई, गायब हो गए पहाड़  जगह- जगह गड्ढों का भकाड़ा…

00 कह रहे लोग जुर्माने का खेला बन्द कर करना होगा राजसात तब बचेगा नदी, पहाड़…


बिलासपुर,,,,  जिले भर के खनिज संपदा की रक्षा का दायित्व संभालने वाले खनिज महकमे ने तीन दिन के मैराथन दौड़ भाग और सर्वे के बाद अवैध रेत, गिट्टी के परिवहन के मामले में 11 वाहनों को पकड़कर सबंधित थाना पुलिस को सौंपने का दावा किया है! इधर शहर में मुख्यमार्ग से लेकर गलियों तक रेत से भरे ट्रैक्टर दौड़ते दिखे…

खनिज महकमे के अफसरो ने गत 11 से 13 मार्च के बीच निरतु, लोफन्दी, कच्छार, लछनपुर, रतनपुर लमेर, लारिपारा घुटकू, निरतु सेंदरी, कोनी, बिरकोना, मोपका, चकरभाठा, दर्रीघाट, जयरामनगर मस्तूरी क्षेत्र में मैराथन दौरे और सघन जाँच कर लारिपारा क्षेत्र से रेत से भरे 2 ट्रेक्टर ट्राली, सेंदरी क्षेत्र से रेत का अवैध परिवहन करते 4 ट्रेक्टर ट्राली, कोनी और जयरामनगर मस्तूरी क्षेत्र से 5 हाइवा को रेत और गिट्टी का अवैध परिवहन करते कुल 11 वाहनों को पकड़कर सम्बंधित थाना पुलिस को सौंपने का दावा किया है! जबकि इन 3 दिनों में सैकड़ो गाड़िया खनिज संसाधन की चोरी नही खुली डकैती हो गई…
पूरी अरपा नदी रेत विहीन हो गई… शहर के चारो ओर की सीमाओं से मिट्टी, पत्थर और मुरूम की बेखौफ और बेधड़क चोरी के कारण बड़े- बड़े गड्ढे हो गए पहाड़ के पहाड़ गायब हो गए पर न तो न तो खनिज माफियाओं के पेट भरा न जिम्मेदारों का…


सबको है पता…

सब को पता है! कि खनिज माफिया का सिंडिकेट चलता कैसे है! और माल कहां- कहा पहुँचता है! पिछले दिनों जांजगीर जिले के महिला नेत्री के वायरल ऑडियो ने सब जाहिर कर दिया कि कैसे पालै पोसै सकल अंग की तर्ज पर इस अवैध कारोबार की गंगा से अडीबाजो, सम्बंधित हिस्सेदारों की सिंचाई होती है! कैसे सिस्टम चलता है…!


तो उठाने होंगे कड़े कदम

यदि समय रहते ठोस कदम नही उठाये गए तो आने वाली पीढ़ी को तस्वीरों में दिखाना पड़ेगा कि शहरवासियों के आस्था की प्रतीक अंतः सलिला माँ अरपा मैय्या पहले ऐसे धवल रेत और निर्मल जल से परिपूर्ण थी! जो आज मैला गड्ढा में तब्दील हो गए… ऐसे पहाड़ और ऐसे पठार होते थे! जो अब मुरूम के अबैध उत्खनन के कारण गड्ढों में तब्दील हो गए… और पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण पहाड़ ही विलुप्त हो गए….

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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