
00 राजस्व महकमे के अफसर भी सन्देह के दायरे में…
00 भू-सुधार के तमाम दावे का हाल बेहाल…
बिलासपुर,,, न्यायधानी बिलासपुर कैसे जमीन का खेला हो रहा आपका जमीन जायजाद कितना सुरक्षित है! आप भी जान लीजिए… चंद होशियारों ने फिर सिस्टम को भोंदू बनाते हुए सन 1928 में मृत एक व्यक्ति को 95 साल बाद सन 2023 में कागजों मे जिंदा कर करोड़ो की जमीन को हड़पने नामांतरण करा पूरे सिस्टम को कटघरे में ला दिया है!
मामला सिरगिट्टी क्षेत्र का है! सन 1928 के राजस्व रिकॉर्ड में यहां की बेशकीमती जमीन कौशल प्रसाद ब्राह्मण के नाम पर दर्ज थी!जालसाजों को पता चला कि तब से आज तक इसका नामांतरण ही नही हुआ है! फिर क्या था! तय षड्यंत्र के तहत जालसाजों ने सन 2023 में जमीन मालिक के एक हम नाम कौशल प्रसाद सूर्यवंशी को खड़ा कर उसे 46 साल का और जीवित दर्शाकर बेशकीमती जमीन का फौती नामांतरण करा दिया… आरोप है! कि 95 साल पुराने रिकॉर्ड को नया चेहरा दिखाकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के बाद रमेश पांडे को पावर ऑफ अटॉर्नी देकर जमीन बिसाहू श्रीवास और कुंती श्रीवास को बेच दी गई… सवाल यह उठ रहा.. कि वास्तविक जमीन मालिक की इस प्रक्रिया में कईं चप्पल घिस जाते है! फिर कागजों के मायाजाल से लेकर नामान्तरण तक के यह खेल क्या बिना राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों के मिली भगत के सम्भव है…!
और उससे भी बड़ा सवाल यह है! कि कांग्रेस शासनकाल में जमीन के फर्जीवाड़े और जमीन उड़ने के मुद्दे पर हवा भरने वाली भाजपा सरकार में ये हो क्या रहा…. जमीनों के फर्जीवाड़ा रोकने के उन सरकारी दावों का क्या…
राजस्व विभाग के सरकारी रिकॉर्ड में सुनियोजित सेंध का ये मामला न सिर्फ बेहद गम्भीर और चौकाने वाला है! बल्कि बड़ा सवाल खड़ा कर रहा कि क्या यह सब बिना किसी विभागीय मिलीभगत के संभव है? क्या सरकार और प्रशासन न्यायधानी के इस संगठित नेटवर्क को अब तोड़ पायेगा या फिर भोंदू कांड की तरह इसी तरह जमीन जायजाद की लूट जारी रहेगी…
क्योकि लगातार सामने आ रही इस तरह की घटनाओं से तो यही लग रहा कि आपके जमीन जायजाद के दस्तावेज की कोई अहमियत ही नही है! यदि आप सक्रिय नही है! तो कोई भी आपकी जमीन जायजाद ऐसे ही फर्जी दस्तावेज हड़प बेच सकता है! उसके बाद आप आजीवन रजिस्ट्री और जमीन सम्बन्धी दस्तावेज लेकर सरकारी दफ्तरों में एड़ियां रगड़ते रहेंगे…क्योकि मामला न्यायधानी को भोंदू बनाने का है…!
गौरतलब है! कि कुछ साल पहले भी इसी तरह शहर के मोपका- चिल्हाटी इलाके से करोड़ो के जमीन घोटाले का मामला सामने आया था! तब शहर के बड़े उधोगपतियों और कारोबारियो के इसमें शामिल होने की चर्चा रही… फिर जादूगर अफसरो ने ऐसी छड़ी घुमाई की रिक्शेवाले भोंदू दास के गले मे पूरे आरोपो की माला पहना उसे जेल भेज दिया गया…
क्या इतने अपढ़ है! जिम्मेदार…?
सवाल यह उठ रहा कि क्या जिम्मेदार इतने अपढ़ है! क्योकि पुराने रिकॉर्ड में जमीन मालिक का नाम कौशल प्रसाद ब्राह्मण दर्ज है! जबकि जिस हमनाम को नामान्तरण के लिए खड़ा करने नाम सामने आ रहा है! उसका नाम कौशल प्रसाद सूर्यवंशी है! फिर रजिस्ट्री हो कैसे गई जब रजिस्ट्रार ऑफिस में 17 बार दस्तखत और दुनिया भर के कॉलम होते है!
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सिरगिट्टी का ये मामला हाल ही में संज्ञान में आया है! मैं बाइट नही दूंगी प्रकरण को पुनर्विलोकन के लिए एसडीएम के समक्ष भेजा गया है! उनका आदेश आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी…!
विनिता शर्मा
नायब तहसीलदार, बिलासपुर
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मामला संज्ञान में आया है! जांच कराई जा रही है! जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी…
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