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18 Apr 2026, Sat

चिल्फी बैरियर बना ‘वसूली अड्डा’: चालान, रिश्वत और दबाव से त्रस्त चालक ने की आत्मदाह की कोशिश, फिर भी खामोश सिस्टम—क्या आम जनता यूं ही लुटती रहेगी या अब होगा बड़ा एक्शन?

बिलासपुर_कवर्धा_चिल्फीघाटी,,, रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 के चिल्फी R.T.O बैरियर पर एक ड्राइवर के आत्मदाह के प्रयास का मामला सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है!
घटना के बाद ड्राइवर घटना स्थल से फरार बताया जा रहा… इसके बावजूद बेरियर स्टाफ ने इसकी सूचना न तो थाने में दी… और न ही परिवहन विभाग के किसी अधिकारी को दी…
बताया जा रहा… कि मायाराम नामक ट्रेलर चालक ट्रेलर में लोहे के एंगल लेकर रायपुर से मध्यप्रदेश जबलपुर जा रहा था….! चिल्फी बैरियर पर लोहे के ऐंगल से भरे ट्रेलर रोका को गया…
बैरियर पर मौजूद एक कर्मचारी ने दुर्व्यवहार करते हुए… गाड़ी खड़ी करने की बातें कही… साथ ही ट्रेलर में एक्सल पहिए नहीं होने की बात कहकर 56 हजार रुपए का चालान काटने की बात कही… हलाकान परेशान चालक को पूरी रात बेरियर पर बितानी पड़ी… तंग आकर चालक ने. पेट्रोल डाल आग लगाने का प्रयास किया… जिससे बैरियर में तैनात प्रभारी और स्टाफ हड़बड़ा गए… किसी तरह झूमाझटकी कर चालक को बचाया गया… आरोप है! किबैरियर पर तैनात 1 कर्मचारी ने उससे 200 रूपए की मांग की जो उसने दे भी दिए… आगे बढ़ने पर कुछ दूरी पर उसे फिर वापस बुला लिया गया… जिसके बाद यह बखेड़ा हुआ…
चिल्फी बैरियर पर किस कदर लूट मची है! ये कलेक्टर से लेकर आमआदमी तक सबको पता है! आलम यह है! कि बैरियर पर पहुँचते ही गाड़ीवालों की बीपी बढ़ जाती है! कि न जाने यहाँ कितने की भेंट पूजा चढ़ानी पड़ेगी… और कितने देर में यहां से छुटकारा मिलेगा…?

फिर शुरू होता है! पुलिस का राडार…

यहां से छूटने के बाद वाहनधारको की हालत आसमान से गिरे खजूर पर लटके जैसी हो जाती है! इसके कुछ किलोमीटर आगे सड़क किनारे पुलिस की गाड़ी में 3-4 वर्दीधारी जंका- मन्का सजा गाड़ी रोक चमकाते है! कि आपकी गाड़ी तय गति सीमा 80 से ज्यादा दौड़ रही है! भेद तब खुला जब बिलासपुर से जबलपुर जा रही… एक पीली पट्टी वाली कमर्शियल गाड़ी को इन पुलिसवालों ने रोका और चालक को साहब से मिलने कहा… मिलने पर साहब ने ओवरस्पीड का प्रकरण बता नकद में एक हजार और चालान कटवाने पर 3 हजार का माला पहनाने की कोशिश की… जब चालक ने बताया कि ये कमर्शियल गाड़ी सरकारी दफ्तर में लगा है! गाड़ी में स्पीड गवर्नर जीपीएस सब है! आप स्क्रीन दिखाइए की गाड़ी 80 के पार दौड़ रही थी…! हम अभी का और पिछले 1 माह का रिकॉर्ड दिखा रहे… पुलिसवालों को कहना पड़ा… आप जाइये बाकी कतार में खड़ी गाड़ियों को हजार- हजार रुपये का न्योछावर लेकर छोड़ा गया…
सवाल यह उठ रहा…. कि क्या आम पब्लिक केवल वोट देने के लिए है! क्योकि नेताओ की गाडियां तो बिना टोल के दौड़ती है! पब्लिक तो टोल, R.T.O और पुलिस सबका जेब भरकर ही आवागमन कर रही है…?
क्या सरकार इस खुली सरकारी डकैती पर अंकुश लगाने कोई खदम उठा आमपब्लिक को राहत देगी… या इन सरकारी डकैतों की खुली डकैती इसी तरह बदस्तूर चलती रहेगी… सवाल आपका है…?

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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