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28 Apr 2026, Tue

गुपचुप जनसुनवाई का ‘रेत खेल’! कुकुर्दीकला में बिना प्रचार आबंटन पर बवाल, प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप, सड़कों की दुर्दशा और पर्यावरण संकट से भड़के ग्रामीण, बोले—अब नहीं सहेंगे, खुली जांच और कार्रवाई जरूरी…

बिलासपुर,,, प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर जिले के मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के जोंधरा के निकट कुकुर्दीकला में नए रेत घाट का गुपचुप तरीके से 29 अप्रेल को जनसुनवाई करवाया जा रहा है, जबकि नियम ये है कि किसी भी रेत घाट का आबंटन नीलामी के पहले जिला जनसंपर्क विभाग के माध्यम से कम से कम एक माह पहले उक्त स्थल का जिक्र करते हुए प्रचार-प्रसार किया जाता है जिसका ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उक्त जनसुनवाई मे अपना पक्ष रखते हुए लिखित और मौखिक शिकायत कर अपना विरोध दर्ज कर सके, लेकिन जिला प्रशासन में बैठे अधिकारी रेत घाट संचालक से लेनदेन कर उक्त जनसुनवाई को गोपनीय तरिके से अपने पसंदीदा रेत घाट संचालक को फायदा पहुंचाया जा रहा है!


काफी विरोध के सुर देखे जा रहे है बताया जा रहा है पहले से संचालित अमलडीहा मे है उक्त रेत घाट से ग्रामीण बहुत परेशान है उक्त रेत घाट संचालक का गुंडागर्दी चरम पर है!

प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के रोड को पूरी तरह खंडहर मे तब्दील किया जा चूका है pmjcy के रोड मे वाहनों की छमता 12 से 14 टन का है पर इस रोड से गुजरने वाले भारी वाहनों से लोड रेत 70,80, और 90 टन तक के होने से रोड बुरी तरह से बर्बाद हो रहे है, अगर समय रहते कुकुर्दीकला मे रेत घाट के आबटन को न रोका गया तो रोड खाई मे तब्दील हो जाएंगे और भारी वाहनों से ग्रामीणों को कुचलने का दौर और बढ़ जाएगा वैसे भी रेत के भारी वाहनों से जोंधरा, पचपेड़ी मल्हार, मस्तूरी क्षेत्र मे आए दिन निर्दोष ग्रामीणों को कुचला जा रहा, जिससे आए दिन रोड मे चक्काजाम हो रहे है! साथ ही लगातार बढ़ते रेत के परिवहन से उक्त क्षेत्र मे जल स्तर कम होते जा रहा है!



ग्रामीणों का कहना है कि रेत से भरे भारी वाहन दिन-रात 24 घंटे गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि चलना भी मुश्किल हो गया है और आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन सड़कों को भारी वाहनों से नुकसान पहुंचाया जाता है, उनके सुधार के लिए रेत घाट संचालकों द्वारा मुरुम डालकर समतलीकरण तक नहीं किया जाता।

स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों में तिरपाल तक नहीं लगाए जाते, जिससे उड़ती धूल सीधे राहगीरों की आंखों में जाती है और लोग बीमारियों का शिकार भी हो रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक बन गई है!



, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और प्रशासन मौन बना हुआ है।

साथ ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर कुकुर्दीकला में नया रेत घाट खोला गया, तो क्षेत्र पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा!

* कुकुर्दीकला के रेत घाट आबनटन पर जिला प्रशासन की भूमिका*

क्षेत्र वासियो जनप्रतिनिधियों का रेत घाट अबटन पर बड़ा सवाल ये है की बिना प्रचार-प्रसार के के रेत घाट का 29 अप्रेल को जनसुनवाई करवाया जा रहा है पर ग्रामीणों को कोई जानकारी नहीं मिला है ये सीधा रेत घाट संचालक से मिलिभगत कर जिले मे बैठे भ्रष्ट अधिकारी ये भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे, इसके लिए सीधे प्रदेश के माननीय सीएम साहब को संज्ञान लेना चाहिए और जिले मे बैठे भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए आश्चर्य की बात यह है कि इस जनसुनवाई की जानकारी बिलासपुर जनसंपर्क अधिकारी को भी नहीं है।




उक्त मामले को लेकर जब जिला खनिज अधिकारी किशोर गोलघाटे को संपर्क किया जिनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। जबकि सूत्रों का कहना है कि इस रेत घाट की गुपचुप सुनवाई के लिए मैनेजमेंट का काम एक युवक के द्वारा किया जा रहा है जो कि पुरातत्व विभाग में बाबू की नौकरी कर रहा है । जबकि बिलासपुर कलेक्टर ने इस मामले में अतिरिक्त कलेक्टर से जानकारी लेने की बात कही है और मामले में गड़बड़ी या नियमानुसार नहीं होने पर इसको निरस्त करने की बात भी कही है। अब इस रेत घाट की जनसुनवाई नियमानुसार हो रही है या अवैध तरीके से इसका जवाब प्रशासनिक स्तर के अधिकारी ही बेहतर दे सकते है।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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