
00 सरकारी आयोजन में दिखे कई रंग, दुकलहिंन ने कहा क्या हो रहा हमे कुछ नही पता…
00 सबने दस्तखत किया, अंगूठा लगाया तो हमने भी पर्चे में लगा दिया ठेंगा…
बिलासपुर,,, सुशासन तिहार के बीच मस्तूरी क्षेत्र के कुकुर्दीकला में रेतघाट की जनसुनवाई के वायरल वीडियो ने शासन- प्रशासन और खटाखट नोट गिनने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रेसवार्ता कर अपने आपको पाक साफ बताने वाले नेता सबकी पोल खोलकर रख दी…
इस सुनियोजित जनसुनवाई में हँसते-हँसते सहमति पत्र पर अंगूठा लगाने वाले दुकलहिंन- सुकलहिंन को पता ही नही की किस बात की जनसुनवाई हो रही, उन्होंने हँसते- हँसते अंगूठा लगा साक्षरता के दावे को ठेंगा दिखा दिया… महिला स्वसहायता समूह की कार्यकर्ता नेता सब सहमति पत्र बांटकर अंगूठा लगवाते दिखे… सवाल यह उठ रहा कि क्या यही जनसुनवाई है! क्या ऐसे होती है! जनसुनवाई…. पैसे के बल पर कराई गई जनसुनवाई के वायरल वीडियो में कई रंग देखने मिले…
इतना ही नही जनसुनवाई के दौरान भावी रेत ठेकेदार के पक्ष में समर्थन जुटाने पड़ोसी गांव की महिलाओ का हुजूम खड़ा करने की बात भी खुलकर सामने आई… तमाम कवायदों के वायरल वीडियो ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए…
ये सारी कवायद भावी ठेकेदार को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से कुकुर्दीकला में प्रस्तावित 11 हेक्टेयर क्षेत्र में रेत खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति दिलाने गत 30 अप्रैल को की गई…
इस परियोजना की वार्षिक उत्खनन क्षमता 99,000 घनमीटर बताई गई है! वीडियो में जनपद पंचायत के एक पदाधिकारी के प्रतिनिधि महिलाओं से समर्थन के पर्चे भरवाते नज़र आई…
खटाखट वाले सत्तासीन पार्टी के नेताजी कुर्सियों पर बैठी महिलाओं को उठाकर समर्थन देने के लिए प्रेरित करते दिखे… सवाल यह उठ रहा… कि जब पूरी पटकथा तय है! तो फिर ऐसे जनसुनवाई के चोचले की जरूरत क्यो…?
नाम- गांव सब फर्जी…
जनसुनवाई में शामिल कई महिलाओ ने खुद को सोनसरी का निवासी बताया… जिनका प्रभावित गांव कुकुर्दीकला से कोई लेना देना ही नहीं…
आरोप ये भी है! कि इन महिलाओं से अन्य लोगों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर करवा फर्जी समर्थन कर खड़ा किया गया… पर जनसुनवाई के जिम्मेदार अफसरो को ये भी नही दिखा… जाहिर है! कि जनसुनवाई के नाम पर खुल्ला खिलवाड़ किया गया…
हमे कुछ नही पता…
जनसुनवाई के दौरान मीडिया के सवाल पर सोनसरी की दुकलहीन बाई ने बताया कि कुछ नही बताया गया… कोई जानकारी नही दी गई…
उन्हें अंगूठा लगाने के लिए पर्चा दिया गया… सबने अंगूठा लगाया दस्तखत किया तो उसने भी अंगूठा लगा दिया… जिस पर्चे पर उन्होंने अंगूठा लगाया है! उसमें लिखा क्या है! पूछने पर जवाब मिला नई जानन…
सब कुछ रिकॉर्ड,,, क्या होगा ठनठन गोपाल…
जनसुनवाई में पहुँचे मीडिया कर्मियों के कैमरों के अलावा मौके पर लगाये गए CCTV फुटेज में भी जनसुनवाई की एक- एक करतूत रिकॉर्ड है! पर सबको पता है! कि इससे होना जाना तो कुछ है ही नही….
खटाखट से शुरू खटाखट से खत्म…
इस चर्चित जनसुनवाई की स्क्रिप्ट जनसुनवाई से पहले ही रिलीज हो गई थी…! सोशल मीडिया का वो वायरल वीडियो सबने देखा जिसमें कथित तौर पर एक भाजपा नेता पेड़ के नीचे खटाखट नोट गिनते नज़र आये थे…! फिर उनकी सफाई भी आई….रही सही कसर जनसुनवाई के नाम पर की गई… ड्रामेबाजी ने उजागर कर दी…
ये रेत है! बड़ी…
रेत से तेल निकालने का ये खेल कितना पुराना और कितना भयावह है! वो शहरवासियों ने देखा रेतमाफिया अरपा की पूरी रेत बेच खा गए….जीवनदायनी अंतःसलिला अरपा मैया मैले गड्ढे में तब्दील हो गई… रेत की कमाई का कोई ओर- छोर नही है! यही वजह है! कि सत्ता- शासन में आते ही नेताओ के लग्गू- भग्गू और भाई- भतीजे पहला हाथ रेत के कारोबार पर ही मारते है! पब्लिक भी समझ गई है! कि यदि अरपा प्रोजेक्ट लागू हो गया. और बारहों माह जलभराव का दावा सही हो गया… तो नेताओ के भाई- भतीजो और लग्गू- भग्गुओ का होगा क्या… यही वजह है! कि सरकारों ने अरपा को केवल चुनावी मुद्दा बना रखा है! तभी तो हालात ज्यो- ज्यो पांव पड़े संतन के… टाइप का है!
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