
बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ के गौरेला क्षेत्र में स्थित एक
राइस मिलर द्वारा राज्य शासन को 21.50 करोड़ की
चपत लगाने का गंभीर मामला सामने आया है।
फकीरचंद अग्रवाल, जो श्याम इंडस्ट्रीज नामक राइस
मिल संचालित करते हैं, ने कस्टम मिलिंग के तहत
FCI में चावल जमा करने के लिए मार्कफेड में
फर्जी बैंक गारंटी जमा कर यह धोखाधड़ी की। इस मामले के सामने आने पर गौरेला पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था! फकीरचंद अग्रवाल ने धान खरीदी सत्र 2021-22 और 2022-23 के दौरान फर्जी बैंक गारंटी जमा करके धान उठाव करने का कृत्य किया। आरोप है कि उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की पेंड्रारोड शाखा से जारी की गई कुल 61 बैंक गारंटियों में से 23 फर्जी गारंटी जमा की, जिसकी कुल राशि 21.50 करोड़ रुपये थी। इस फर्जीवाड़े की पुष्टि विपणन कार्यालय और क्षेत्रीय व्यवसाय कार्यालय द्वारा की गई थी, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
अग्रवाल ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायालय, पेंड्रारोड में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि उन्हें उनके व्यापारिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा साजिशन फंसाया जा रहा है और उन्हें जेल भेजने की धमकियां दी जा रही हैं! हालांकि, कोर्ट ने उनके इस तर्क को नकारते हुए जमानत याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त के खिलाफ गंभीर प्रकृति का अपराध दर्ज है, और यदि उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता है तो विचारण के दौरान साक्ष्यों को प्रभावित करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इस आधार पर अग्रिम जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि फर्जी बैंक गारंटी के माध्यम से धान उठाव की यह कार्रवाई एक गंभीर धोखाधड़ी है, जिसमें सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। अभियुक्त के कब्जे में अभी भी मूल बांड पत्र होने की बात भी सामने आई, जो इस मामले को और गंभीर बनाता है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है! कि अग्रिम जमानत देना न्यायसंगत नही होगा! इस पूरे मामले की जांच टीम ने विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी है, जिसमें फकीरचंद अग्रवाल और उनके परिवारिक सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन राइस मिलों ने फर्जी बैंक गारंटी जमा की है, उन्हें काली सूची में डाल दिया जाए और धान खरीदी सत्र 2022-23 में उन्हें कोई नया डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) जारी न किया जाए।
फर्जी बैंक गारंटी के माध्यम से चावल मिलर फकीरचंद अग्रवाल द्वारा की गई यह धोखाधड़ी राज्य सरकार के लिए एक गंभीर वित्तीय नुकसान है। अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किए जाने से यह स्पष्ट होता है कि इस मामले में कानून कड़ा रुख अपना रहा है। यह घटना छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं और वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी उजागर करती है।
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