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30 Jan 2026, Fri

प्रशासनिक उदासीनता के शिकार हुए,75 वर्षीय निहचल सिंह बुजुर्ग ने मांगा इक्छा मृत्यु, उम्र के अंतिम पड़ाव में हुए गबन के बने शिकार…

बिलासपुर,,, 75 वर्षीय निहचल सिंह का जीवन एक भयावह कहानी है! जिसमें वे प्रशासनिक उदासीनता, भ्रष्टाचार और खुद के जीवनभर की मेहनत की गाढ़ी कमाई की गबन का शिकार हुए हैं! तखतपुर, बिलासपुर जिले के निवासी निहचल सिंह के जीवन की राह कठिनाइयों से भरी हुई है! लेकिन अब उनकी उम्मीदें धीरे-धीरे चुकती जा रही हैं!

निहचल सिंह ने वर्ष 2010 में पंजाब बैंक में अपने परिवार के नाम पर 10 लाख रुपए का फिक्स डिपॉजिट किया था! ताकि यह राशि उनके परिवार की वित्तीय सुरक्षा के रूप में काम आए!

यह राशि उनके जीवनभर की मेहनत का फल थी! जिसमें उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी बचत की थी! लेकिन जब वे 2023 में अपनी जमा राशि को रिनिवल करने के लिए बैंक गए!  तो उन्हें एक दिल दहला देने वाली सच्चाई का सामना करना पड़ा! बैंक में उनके खाते में छेड़छाड़ कर दी गई थी! और नगद राशि का गबन किया गया था! बैंक के मैनेजर और कैशियर ने इसे फर्जी तरीके से अंजाम दिया! जिससे निहचल सिंह का पैसा पूरी तरह से गायब हो गया!

निहचल सिंह पीड़ित

यह एक कड़वा सच था! जिसे निहचल सिंह ने हृदय में ही नहीं, बल्कि अपनी आंखों में भी देखा! वर्षों की मेहनत और बचत को खोने के बाद, वे प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए न्याय की उम्मीद में भटकने लगे! वे पिछले 11 महीनों से कलेक्टर,  एसपी और आईजी के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं! लेकिन उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ! निहचल सिंह की आंखों में न्याय की आशा अब धुंधली हो चुकी है!

निहचल सिंह की जिंदगी की कठिनाइयां यहीं खत्म नहीं होतीं! कोरोनाकाल में उन्होंने अपनी पत्नी को खो दिया और अब अपने इलाज के लिए पैसे की कमी से जूझ रहे हैं!इसके बावजूद, प्रशासन से न्याय की उम्मीद नहीं मिल रही है! वे पूरी तरह से टूट चुके हैं! और अब अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त करने के लिए शासन से इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे हैं!

यह मामला न केवल प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करता है! बल्कि यह समाज की जिम्मेदारी भी है! कि वे ऐसे संकट में फंसे व्यक्तियों की मदद करें! निहचल सिंह का हश्र यह दिखाता है! कि कैसे एक व्यक्ति की पूरी जिंदगी की मेहनत और भविष्य को भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही लूट लेती है! यह हम सभी के लिए एक कठोर सत्य है! कि कभी न कभी हमें ऐसे मामलों पर गंभीरता से विचार करना होगा! ताकि भविष्य में निहचल सिंह जैसे लोगों को न्याय मिल सके और उनकी उम्मीदें न टूटें!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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