
बिलासपुर,,, एक साल पहले पदस्थ महिला आबकारी उपायुक्त के विवादास्पद बयान ने खुलासा किया था! कि आबकारी विभाग अवैध शराब की तस्करी और बिक्री को लेकर कार्रवाई नहीं करता, बल्कि सरकार के राजस्व में वृद्धि पर ज्यादा ध्यान देता है! यह बयान उस वक्त सामने आया था! जब उन्होंने कहा था! कि अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई न होने से कम से कम सरकार का राजस्व तो बढ़ रहा है! चाहे शराब वैध हो या अवैध!
यह बयान इस बात को प्रमाणित करता है! कि आबकारी विभाग अवैध शराब की तस्करी को रोकने में क्यों नाकाम है! और विभाग की प्राथमिकता सरकारी शराब की बिक्री और राजस्व में वृद्धि पर है! यही वजह है! कि अवैध शराब से संबंधित मामलों में पुलिस ज्यादा सक्रिय नजर आती है! जबकि आबकारी विभाग इस पर कोई सख्त कदम नहीं उठाता.? गांव-गांव में अवैध शराब की बिक्री, खासकर आबकारी विभाग के संरक्षण में, यह आरोप लगाना अब शायद गलत नहीं होगा!
हाल ही में लोफदी में 9 ग्रामीणों की मौत शराब पीने से हुई थी! लेकिन आबकारी विभाग ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया.? केवल दिखावे के लिए कुछ अवैध शराब के प्रकरण बनाए गए! ताकि यह लगे कि विभाग अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है! इसी दौरान, तीन दिन पहले सवा करोड़ रुपये की अंग्रेजी शराब पकड़ी गई थी! लेकिन इस शराब की तस्करी का नेटवर्क, मंगवाने वाला कौन था! और यह कहां जा रही थी! इसके बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है!
शराब की पेटियों से भरा कंटेनर पकड़े जाने के बाद जिन दो आरोपियों का नाम सामने आ रहा है! उनकी तलाश अभी भी जारी है! पंकज सिंह और एक अन्य आरोपी के बारे में यह जानकारी मिल रही है! कि यह दोनों आरोपी अवैध रूप से दिल्ली समेत अन्य राज्यों से शराब मंगवाने में माहिर हैं! यह दोनों अपने नेटवर्क के जरिए फर्जी कागजात और पास बनवाने का काम बखूबी करते थे! इनमें से एक आरोपी तो नगरीय निकाय के चुनाव में उम्मीदवार था! लेकिन सवा करोड़ रुपये की शराब की तस्करी पकड़े जाने के बाद उसने चुनाव से नाम वापस ले लिया और फरार हो गया!
सूत्रों के अनुसार, यह शराब तस्कर बिलासपुर सहित दिल्ली और अन्य राज्यों में एक बड़ा नेटवर्क चला रहे थे! और पंचायत चुनाव के दौरान लाखों रुपये की अवैध शराब आपूर्ति करने की योजना बना रहे थे! शराब से 9 लोगों की मौत के बाद पुलिस और आबकारी विभाग को मजबूरी में कार्रवाई करनी पड़ी! लेकिन इस बीच चुनाव में अधिकांश प्रत्याशियों ने पहले से ही पर्याप्त शराब जुटा ली थी! और मतदान से पहले यह शराब वांछित वोटरों तक पहुंचाई गई! जिन प्रत्याशियों को शराब नहीं मिल पाई! उन्होंने नकदी बांटने का सहारा लिया!
नगरीय निकाय चुनाव के दौरान पुलिस और आबकारी विभाग ने किसी भी प्रत्याशी को शराब पकड़ा नहीं! यह कटु सत्य है! कि इस चुनाव में सवा करोड़ रुपये की शराब मंगवाने वाले आरोपी पुलिस और आबकारी विभाग के लिए अब भी एक रहस्य बने हुए हैं! चुनाव के बाद, यह संभावना जताई जा रही है! कि इन आरोपियों का अता-पता नहीं चलेगा और वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे!
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