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2 Feb 2026, Mon

अपोलो की ‘सुपर स्पेशियलिटी’ में फर्जीवाड़ा, जान ले गया नकली डॉक्टर, डिग्री फर्जी, मौत असली – अपोलो के डॉक्टर ने छीनी ज़िंदगी, फर्जी डॉक्टर के खिलाफ FIR दर्ज…

बिलासपुर,,, सरकन्डा पुलिस ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और अविभाजित मध्यप्रदेश के धाकड़ नेता राजेन्द्र शुक्ल की अपोलो में इलाज के दौरान हुई मौत मामले में उनके पुत्र डा प्रदीप शुक्ला की लिखित शिकायत पर अपोलो प्रबंधन और फर्जी डॉक्टर विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जैम कैम के खिलाफ गैरइरादतन हत्या धोखाधड़ी व कूटरचना के मामले मे धारा 420, 465, 466, 468, 471, 304, 34 के तहत अपराध दर्ज किया है।
पुलिस के मुताबिक हृदय रोग की शिकायत पर 21 जुलाई 2006 को पंडित राजेन्द्र शुक्ला को अपोलो में भर्ती कराया गया था। गत 20 अगस्त 2006 को ईलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी। मध्यप्रदेश के दमोह पुलिस ने जब डॉ विक्रमादित्य को हार्ट के सात मरीजों के आपरेशन के बाद सातो की मौत के मामले बवाल मचने और आरोप लगने पर जब उनके डिग्री की जांच की तो डा. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जान केम के हृदय रोग विशेषज्ञ की डिग्री फर्जी होना पाया गया।
इसके बाद डॉ.प्रदीप शुक्ला ने सरकंडा थाने में फिर लिखित
शिकायत दर्ज कराई कि उनके पिता का ईलाज। भी उस समय अपोलो में पदस्थ कथित फर्जी कार्डियोलाजिस्ट डॉ विक्रमादित्य उर्फ नरेन्द्र जान कैम ने किया था। उन्होंने ऑपरेशन के बाद हुई उनके पिता की मौत के लिए उक्त डॉक्टर और अपोलो प्रबन्धन को जिम्मेदार ठहरा कार्रवाई की मांग की। साथ ही अपोलो प्रबन्धन पर
लीपापोती कर मामले को दबाने का आरोप लगाया। डॉ विक्रमादित्य उर्फ नरेंद्र अपोलो के बाद दमोह के मिशन अस्पताल में पदस्थ रहे।
गत 8 अप्रैल 2025 को समाचार पत्रो से जब पूर्व में अपोलो अस्पताल में पदस्थ डा. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव को दमोह पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की खबर आई कि उनके द्वारा किये गए हार्ट के सात मरीजो के ऑपरेशन के बक़द सातों की मौत हो गई तब से अपोलो प्रबन्धन पर गम्भीर आरोप लग रहे है। अपोलो प्रबन्धन के जिम्मेदार अफसरों और डॉ विक्रमादित्य उर्फ नरेंद्र के गिरफ्तारी की मांग उठ रही है। दमोह पुलिस के अनुसार डा. विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जान केम के हृदय रोग विशेषज्ञ की डिग्री फर्जी पायी गयी है।
डॉ विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र गत 1 जून 2006 से 31 मार्च 2007 तक यहां अपोलो में पदस्थ रहे।
अपोलो ने नही दिया विक्रमादित्य ने दिखाया पहाड़
डा.प्रदीप शुक्ला के अनुसार मांग जाने पर अपोलो प्रबंधन ने डॉ नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव का नियुक्ति पत्र तो दिया है। लेकिन डॉ. की योग्यता को लेकर अभी तक किसी प्रकार का दस्तावेज नही दिया है। इधर डॉ विक्रमादित्य उर्फ नरेंद्र कैम ने सोशल साइट्स पर अपनी डिग्रियों का पहाड़ खड़ा कर दिया। जिसमें उन्होंने दुनिया के कई देशों में रिसर्च करने
और मिली उपलब्धियों का जिक्र किया है। लेकिन दमोह पुलिस ने छानबीन के दौरान जाहिर कर दिया कि डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य के पास किसी प्रकार की डिग्री नहीं है। बावजूद इसके वह अपोलो जैसे सुपरमल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल समेत अलग अलग अस्पतालो में सैकड़ों आरपेशन कर लोगों की जान से खुला खिलवाड़ करते रहे।
गिरफ्तारी के बाद डॉ विक्रमादित्य उर्फ नरेंद्र ने
दमोह पुलिस को बताया कि उन्होंने 1996 में नार्थ बंगाल मेडिकल कालेज दार्जिलिंग से MBBS किया। यूनिवर्सिटी आफ कलकत्ता से 5 सितम्बर 1999 को डा. आफ मेडिसीन का डिग्री लेने। पाण्डिचेरी यूनिवर्सिटी से जुलाई 2013 में डा. आफ मेडिसीन की डिग्री प्राप्त करने की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने आन्ध्रप्रदेश मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी दिखाया जो नरेन्द्र जान केम के नाम से है।जबकि दमोह पुलिस के अनुसार नरेन्द्र विक्रमादित्य की सभी डिग्रियां फर्जी हैं।
इधर जिला कांग्रेस कमेटी ने अपोलो प्रबन्धन और फर्जी डॉक्टर के खिलाफ पहले ही मोर्चा खोल रखा है।
बड़ा सवाल कहा जाय आमजन
छत्तीसगढ़ की जनता के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि आखिर वे विश्वास करें तो किस पर करे। नसबन्दी और अखफोड़वा कांड में कभी दवाओं में जहर तो कभी इंफेक्शन की बाते सामने आई। अब अपोलो जैसे सुपरमल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के फर्जी डॉक्टर द्वारा 80 फीसदी हार्ट पेशेंट की जान लेने की बात सामने आ गई। सवाल यह उठ रहा कि जब दवाई फैल डॉक्टर फैल तो छत्तीसगढ़ की जनता इलाज के लिए किस पर विश्वास करे।
लगातार एक पैर के बजाय दूसरे पैर का ऑपरेशन करने, गलत इलाज से मरीज का हाथ काटने की नौबत आने और तो और जिला अस्पताल की क्लास 1 डॉक्टर द्वारा नसबंदी ऑपरेशन के दौरान पीड़िता की आंत को काट उस्की जान को सांसत में डालने का मामला भी सामने आ चुका है।
बेशर्मी की हद ये है कि आज तक न्यायधनी मे सैकड़ो ऐसे मामले आये शिकायते भी हुई पर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की गई, विभाग के जिम्मेदार अफसर और जनप्रतिनिधि सरकारी अस्पतालों के प्रति विश्वास जागृत करने के लिए ठोस पहल करने के बजाय सिर्फ कागजी नोटिस की कश्ती ही दौड़ा रहे है।
फर्जी तेरे कितने नाम
फर्जी डॉक्टर को अपोलो में डॉ विक्रमादित्य यादव के नाम से जाना जाता था, अब उनका एक और नाम नरेंद्र कैम सामने आया है। सवाल यह उठ रहे कि आखिर इस डॉक्टर के और कितने नाम है और इन नामो का फंडा है क्या इसकी जांच भी जरूरी है।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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