
बिलासपुर,,, जिले के अपोलो अस्पताल में फर्जी डॉक्टर का पर्दाफाश होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है! सरकंडा पुलिस ने फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट और अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है! और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है!
फर्जी डिग्रियों का खुलासा
जांच के दौरान पता चला है! कि आरोपी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव के पास एमबीबीएस की दो डिग्रियां हैं! एक डिग्री उसके नाम पर है! जबकि दूसरी नरेंद्र केम जान नाम से बनाई गई है! इतना ही नहीं, एमडी और डीएम की डिग्रियां भी पूरी तरह फर्जी पाई गई हैं!
दमोह पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिन डिग्रियों को आरोपी डॉक्टर ने दिखाया था! उनमें से एक महिला के नाम पर है! और बाकी में न तो पंजीयन नंबर है!और न ही तारीख का उल्लेख डिग्री में वाइस चांसलर और चांसलर के हस्ताक्षर भी नकली पाए गए हैं! बताया गया कि डिग्री में जुलाई 2013 का ज़िक्र है! जबकि उस समय के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हस्ताक्षर उसमें मौजूद नहीं थे! बल्कि फर्जी हस्ताक्षर थे!
प्रबंधन की लापरवाही उजागर
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डॉक्टर ने अस्पतालों में नौकरी करते समय केवल एमबीबीएस की डिग्री जमा की थी! लेकिन इसके बावजूद वह कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत था और ऑपरेशन जैसे गंभीर काम कर रहा था! जिसके लिए एमएस की डिग्री अनिवार्य होती है!
पुलिस की कार्रवाई और अगला कदम
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं! जल्दी ही पुलिस की एक टीम दमोह रवाना होगी!
एसएसपी के अनुसार, इस मामले में अपोलो अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जा रही है! यह देखा जाएगा कि किस स्तर पर लापरवाही बरती गई और फर्जी डिग्रियों के बावजूद डॉक्टर को कैसे नियुक्त किया गया!
स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ बेहद चिंता का विषय है।
इस मामले को लेकर शहर में भी चर्चा गर्म है और आम नागरिकों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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