Breaking
7 Mar 2026, Sat

एक मुट्ठी धान, हजारों मुस्कान: बिलासपुर में छेर छेरा पर्व की धूम, घर-घर गूंजा पारंपरिक स्वर, दान बना पहचान, सहयोग-संवेदना और संस्कृति के रंग में रंगा पूरा छत्तीसगढ़….

बिलासपुर,,,, छेर छेरा कोठी के धान का हेरते हेरा छत्तीसगढ़ में छेर छेरा पर्व बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है! यह त्योहार मुख्य रूप से दान और फसल उत्सव के रूप में जाना जाता है!पौष मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि दान, समानता और सामाजिक समरसता का महापर्व है!


छेर छेरा पर्व नई फसल के घर आने की खुशी का प्रतीक है! किसान अपनी मेहनत से उपजी फसल को पाकर इस दिन ईश्वर का धन्यवाद करते हैं! और समाज के साथ उसे साझा करते हैं! यही इस पर्व की सबसे बड़ी खासियत है! कि खुशी को बांटना इस दिन गांवों और शहरों में बच्चों, युवाओं और महिलाओं की टोलियां घर-घर जाकर पारंपरिक स्वर में कहती हैं! छेर छेरा… कोठी के धान ल हेर हेरा…इस मधुर पुकार के साथ लोग खुशी-खुशी धान, अनाज, साग-भाजी, फल और धन का दान करते हैं! हर घर से निकलने वाली एक-एक मुट्ठी धान समाज में सहयोग और संवेदनशीलता की मिसाल बन जाती है!


छेर छेरा पर्व से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भी इसे और अधिक पवित्र बनाती हैं! मान्यता है! कि इसी दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी! इसी कारण इस दिन दान को महापुण्य माना जाता है! साथ ही, यह पर्व मां शाकंभरी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है! जो अन्न और प्रकृति की देवी मानी जाती हैं!


ग्रामीण अंचलों में छेर छेरा की परंपरा आज भी पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ जीवित है! सुबह से ही महिलाएं घर के भंडार से धान निकालकर टोकरी में सजाती हैं! और आने वाली टोलियों को दान देती हैं! हालांकि शहरी क्षेत्रों में यह परंपरा कुछ कम जरूर हुई है! लेकिन इसकी भावना आज भी लोगों के दिलों में जीवित हु! छेर छेरा पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सशक्त प्रतीक है! यह त्योहार समाज को यह संदेश देता है! कि संपन्न लोग जरूरतमंदों का सहारा बनें, और कोई भी भूखा न रहे! इस वर्ष छत्तीसगढ़ सरकार ने छेरछेरा पर्व पर सामान्य अवकाश घोषित किया है!

Author Profile

प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
Latest entries

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed