
रायपुर,,,, राजधानी के बहुचर्चित टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी सेंटर से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है! शंकर नगर स्थित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर में बच्चों की अदला-बदली के गंभीर आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है! कोर्ट ने रायपुर एसपी को आदेश दिया है! कि सेंटर के संचालक डॉ. नीरज पहलाजानी समेत मेडिकल बोर्ड में शामिल सभी डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए…


यह मामला उस वक्त और गंभीर हो गया… जब डॉ. पहलाजानी का नाम पहले ही 700 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले में सामने आ चुका है! प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी इस मामले में उनसे पूछताछ कर चुकी है! ऐसे में अब बच्चों की अदला-बदली का मामला सामने आने से उनकी भूमिका और अधिक संदिग्ध मानी जा रही है!
दरअसल, पूरा मामला 25 दिसंबर 2023 का है! आरोप है! कि उस दिन पहलाजानी सरोगेसी सेंटर में एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था! शिकायतकर्ता के मुताबिक, जन्म के समय एक लड़का और एक लड़की पैदा हुए थे! लेकिन कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने परिजनों को दो लड़कियां सौंप दीं… इस पर परिवार को शक हुआ और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किए…

मामला तूल पकड़ने के बाद डीएनए जांच कराई गई… जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ… डीएनए जांच में पाया गया… कि सौंपी गई… दो बच्चियों में से केवल एक ही बच्ची जैविक माता-पिता की संतान थी! जबकि दूसरी बच्ची का डीएनए किसी भी माता-पिता से मेल नहीं खाता था! इस रिपोर्ट के बाद बच्चों की अदला-बदली का आरोप प्रमाणित माना गया!

हालांकि, पीड़ित परिवार का आरोप है! कि सच्चाई सामने आने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की… जब परिवार ने पुलिस में एफआईआर की मांग की… तो तत्कालीन सीएमएचओ की अगुवाई में मेडिकल बोर्ड गठित किया गया… इस बोर्ड में शामिल छह डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी…

पीड़ितों का दावा है! कि बच्चा चोर गिरोह और रसूखदार डॉक्टरों की सांठगांठ के चलते उन्हें न्याय नहीं मिल रहा… मजबूर होकर परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन तकनीकी कारणों और कानूनी पेचों के चलते याचिका खारिज हो गई! इसके बाद पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा… सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की… कोर्ट ने माना कि यह मामला बेहद गंभीर है! और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है! कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए और स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया जांच में कई खामियां नजर आती हैं!

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने रायपुर पुलिस को आदेश दिया कि डॉ. पहलाजानी, सरोगेसी सेंटर प्रबंधन और मेडिकल बोर्ड के सभी सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए… अब यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी… सूत्रों के मुताबिक, रायपुर पुलिस जल्द ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और धरपकड़ शुरू कर सकती है! यह मामला न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है! बल्कि सिस्टम में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर चिंता पैदा करता है!
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