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21 May 2026, Thu

दुकान में स्टॉक खत्म, बाहर फुल सप्लाई ऑन कोटा में सरकारी शराब दुकान के बाहर ब्लैक में दारू का खेल वायरल, पुलिस-आबकारी बेखबर… जनता पूछ रही ये कमी है, सेटिंग है या पूरा सरकारी मुनाफा मॉडल चल रहा है?

बिलासपुर,,,, जिले के कोटा में सरकारी शराब दुकान के बाहर जो खेल चल रहा है! उसने आबकारी व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी है!वायरल वीडियो में खुलेआम शराब की अवैध बिक्री, ग्राहकों की भीड़ और चखना सेंटर के जरिए “ब्लैक मार्केट” का धंधा साफ दिखाई दे रहा है! इस वीडियो के सामने आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है! सरकार द्वारा नई आबकारी नीति के चलते अब शराब को कांच की शीशी की जगह प्लास्टिक की बोतलों के सप्लाई करने का फरमान जारी किया गया है! जिसके बाद से लगातार जिले में शराब की कमी बताई जा रही… और इसी का फायदा उठाकर अब शराब माफियाओं के इशारे पर खुलेआम सस्ती शराब महंगे दामों में खुलेआम बेच कर मुनाफाखोरी की जा रही है! सबसे हैरानी की बात है! कि यह शराब का खेल कई दिनों से चालू है! लेकिन पुलिस विभाग और आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी… जिससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है! कि पुलिस विभाग और आबकारी विभाग का सूचना तंत्र कितना कमजोर है ? सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है! कि यह खेल कई दिनों से चल रहा है! और शराब लेने के लिए ग्राहकों की भारी भीड़ लगी रहती है!
सरकारी दुकान में देशी शराब की कमी बताई जा रही है! लेकिन दुकान के बाहर वही शराब “स्पेशल सप्लाई” बनकर 200 रुपये प्रति पाव में आसानी से मिल रही है! सवाल यह है! कि जब स्टॉक खत्म है! तो बाहर शराब आ कहां से रही है? चखना सेंटर अब सिर्फ नमकीन और सलाद तक सीमित नहीं रहे…. बल्कि अवैध शराब बिक्री के नए “काउंटर” बनते जा रहे हैं! सबसे बड़ा सवाल यह है! कि यह सब बिना संरक्षण के संभव है! क्या? अगर नहीं, तो फिर जिम्मेदार कौन है? स्थानीय लोगों का आरोप है! कि पिछले कई दिनों से कमी का माहौल जानबूझकर बनाया गया…. ताकि बाहर ऊंचे दाम पर शराब बेची जा सके…. यानी सरकारी सिस्टम की आड़ में “कमी” पैदा करो और फिर जनता की जेब काटो… अब देखना यह होगा… कि आबकारी विभाग इस वायरल वीडियो को सिर्फ “जांच का विषय” बताकर फाइलों में दबा देता है! या फिर अवैध सप्लाई चैन और उसके संरक्षकों पर कार्रवाई भी होती है! क्योंकि यहां सवाल सिर्फ शराब का नहीं, बल्कि कानून की खुली नीलामी का है! फिलहाल इस मामले में अभी तक पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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