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11 Jul 2026, Sat

EMI ली, खाते में नहीं चढ़ाई? सेंट बैंक होम फाइनेंस की ब्रांच मैनेजर अपर्णा विश्वास और कर्मचारी नितिन निगम पर धोखाधड़ी का केस, 4.60 लाख की कथित हेराफेरी, भुगतान के बाद भी मकान कुर्की की तैयारी का आरोप…

बिलासपुर,,,,  शहर के व्यापार विहार स्थित सेंट बैंक होम फाइनेंस लिमिटेड में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है! कंपनी के एक ऋणधारक द्वारा जमा की गई… {EMI} और अन्य भुगतान की राशि को ऋण खाते में दर्ज नहीं करने तथा लगभग 4 लाख 60 हजार रुपये के कथित गबन का आरोप लगाते हुए पुलिस ने कंपनी की ब्रांच मैनेजर अपर्णा विश्वास और सहायक कर्मचारी नितिन निगम के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता/भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है!
पुलिस के अनुसार, प्रार्थी शकील कुरैशी, निवासी हेमूनगर, थाना तोरवा, ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर आरोप लगाया था…. कि उन्होंने वर्ष 2012 में अपनी भूमि को बंधक रखकर सेंट बैंक होम फाइनेंस लिमिटेड से 12 लाख रुपये का आवास ऋण लिया था…. ऋण की अदायगी 180 मासिक किस्तों के माध्यम से की जानी थी…. और वे कोरोना महामारी से पहले तक नियमित रूप से {EMI} का भुगतान करते रहे… बाद में भी उन्होंने समय-समय पर बड़ी राशि जमा कर अपने ऋण का भुगतान किया…
शिकायत के अनुसार, कंपनी द्वारा 9 दिसंबर 2025 को जारी ऋण विवरण में बताया गया…. कि उनके खाते में 27 लाख 58 हजार 874 रुपये जमा किए जा चुके हैं! जबकि प्रार्थी का दावा है! कि उन्होंने इससे भी अधिक राशि का भुगतान किया है! और सभी भुगतानों की रसीदें उनके पास सुरक्षित हैं!
प्रार्थी ने आरोप लगाया कि कंपनी की ब्रांच मैनेजर अपर्णा विश्वास और कर्मचारी नितिन निगम ने आपसी मिलीभगत से उनके द्वारा जमा की गई… कई किश्तों और एकमुश्त भुगतान की राशि को जानबूझकर ऋण खाते में दर्ज नहीं किया…. शिकायत में उल्लेख है! कि 30 मार्च 2019 को 2 लाख 75 हजार रुपये नकद, 5 फरवरी 2024 को 3 लाख रुपये डिमांड ड्राफ्ट तथा अन्य भुगतान मिलाकर कुल 7 लाख 35 हजार रुपये जमा किए गए थे… इनमें से केवल 2 लाख 75 हजार रुपये की प्रविष्टि ऋण खाते में की गई…. जबकि शेष 4 लाख 60 हजार रुपये का कोई लेखा-जोखा खाते में दर्ज नहीं किया गया…
इतना ही नहीं, प्रार्थी का आरोप है! कि भुगतान के बावजूद कंपनी ने उनके ऋण खाते में 15 लाख 97 हजार 657 रुपये बकाया दर्शा दिए और बंधक रखी गई…. संपत्ति को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली… इसे उन्होंने सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र बताते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की…
पुलिस द्वारा शिकायत के साथ प्रस्तुत बैंक खाते के स्टेटमेंट, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों का परीक्षण किया गया…. जांच में प्रथम दृष्टया लगभग 4.60 लाख रुपये की जमा राशि ऋण खाते में दर्ज नहीं होना पाया गया… इसके आधार पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी एवं साझा आपराधिक मंशा का मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है!
पुलिस का कहना है! कि विवेचना के दौरान ऋण खाते की पूरी हिस्ट्री, बैंक रिकॉर्ड, भुगतान की रसीदें, डिमांड ड्राफ्ट, नकद जमा संबंधी दस्तावेज तथा कंपनी के लेखा अभिलेखों का मिलान किया जाएगा…. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं! तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विधि अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी…. यह मामला सामने आने के बाद बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों में ऋण खातों के रखरखाव और भुगतान प्रविष्टियों की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं! पुलिस अब यह भी जांच कर रही है! कि यह अनियमितता केवल एक खाते तक सीमित है! या अन्य ऋण खातों में भी इसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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