Breaking
29 Jan 2026, Thu

सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और साय सरकार के आदेश का पालन हेतु डीएड अभ्यर्थियों का सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए निकली न्याय यात्रा,,,

बिलासपुर,,, सहायक शिक्षक भर्ती 2023 का विज्ञापन 04 मई 2023 को विज्ञापित किया गया था जिसे डीएड अभ्यर्थियों ने 30 दिवस भीतर परीक्षा पूर्व माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट मे याचिका (WPS 3541/2023) दायर कर चैलेंज किया था. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में डीएड वर्सेस बीएड विवाद का फैसला जनवरी 2023 में सुरक्षित कर लिया गया था जिसका फैसला 11 अगस्त 2023 को जारी किया गया इस फैसले के अनुसार बीएड डिग्री को सहायक शिक्षक पद के लिए असंवैधानिक घोषित किया जिसके

पालनार्थ मे माननीय छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 21 अगस्त 2023 को केवल डीएड अभ्यर्थियों का काउंसलिंग मे भाग लेने का आदेश पारित किया था जिसे बीएड डिग्री धारको ने सुप्रीम कोर्ट मे चैलेंज किया जिस पर अंतरिम आदेशानुसार बीएड डिग्री धारको का काउंसलिंग और नियुक्ति माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन माननीय सुप्रीम कोर्ट ने रखा जिस पर अंतिम फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 02 अप्रैल 2024 को दिया जिसके अनुसार सहायक शिक्षक पद पर बीएड डिग्री धारको के स्थान पर केवल डीएड धारको की 06 सप्ताह के भीतर नियुक्ति का अंतिम आदेश पारित किया ।

माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले के विरूद्ध बीएड डिग्री धारको ने 06 याचिका और छत्तीसगढ़ सरकार ने 02 याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट मे चैलेंज किया जिसे 28 अगस्त 2024 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इन समस्त याचिका खारिज कर डीएड के पक्ष में फैसला दिया और हाईकोर्ट के फैसले को पूर्णतः सही ठहराते हुए इस विवाद को अंतिम रूप से निस्तारित कर फैसले को जल्द पालन करने का निर्देश छत्तीसगढ़ सरकार को दिया है।

माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को 06 महीने और माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को 01 महीना होने को है, न्यायालय के इस फैसले पर विभाग और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं किया गया है जिससे काउंसलिंग कराकर अपने पद से वंचित बेरोजगार, मानसिक रूप से पीडित डीएड अभ्यर्थी व्यथित होकर न्याय के लिए यात्रा निकालकर विभाग और सरकार से नियुक्ति न्यायालय का रहे हैं। देश के हर कबित नागरिक राजा हो या रंक न्याय के लिए सरकार के सुरशरण जाते है न्याय मिलने के बाद भी डीएड को हक न मिलने पर विनायक सुशासन पर सवाल खड़ा कर रहे है वाद न्यायापालिका के आदेश पालन के बिना यह साय सरकार का कैसा सुशासन है। है कि न्यायापारिलालय में लड़े है. जीत कर आज भी नियुक्ति के लिए सड़क पर खड़े है।

Author Profile

प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
Latest entries

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed