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रतनपुर माँ महामाया के दरबार मे खाखी वर्दी की करतूत छुट्टे मांगने के नाम पर भक्तिन से ठग लिए 2 सौ रुपये रतनपुर थाने में की शिकायत…

बिलासपुर,,, जिले के रतनपुर स्थित माँ महामाया मंदिर परिसर में एक अनोखी घटना सामने आई है। एक भक्तिन ने आरोप लगाया है कि एक खाकी वर्दीधारी व्यक्ति ने उससे दो सौ रुपए खुल्ले के नाम पर लिए और फिर वापस लौटकर नहीं आया। मामले का अभी तक रतनपुर थाने में शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियां देखी गई हैं, जिससे उसका असली परिचय स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।

भक्तिन का दिनभर का चिल्हर लेकर चला गया खाकी वर्दीधारी

भैंसों जेवरा की निवासी यह भक्तिन महामाया मंदिर परिसर में बैठकर अपनी अजीविका चलाती है। मंगलवार की शाम को वह अन्य भिक्षुओं के साथ वीआईपी निकासी गेट की ओर बैठी थी। उसी समय खाकी वर्दी पहने एक आदमी वहां पहुंचा और दो सौ रुपए के खुल्ले की मांग की। उसने पांच सौ रुपए का नोट दिखाकर चिल्हर कराने को कहा, जिसके बाद भक्तिन ने अपनी दिन भर की कमाई से उसे दो सौ रुपए दे दिए।

सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध हरकतें, पुलिसकर्मी होने पर संदेह

चिल्हर लेकर जाने के बाद खाकी वर्दीधारी व्यक्ति लौटकर नहीं आया। भक्तिन ने उसे आसपास ढूंढने की काफी कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं मिला तो उसने महामाया मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय में जाकर घटना की जानकारी दी। इसके बाद वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई, जिसमें खाकी वर्दीधारी व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध नजर आईं। वीडियो में उसकी शारीरिक भाषा, कमर पर ढीला बेल्ट और असामान्य चाल जैसे संकेत उसकी पहचान पर संदेह पैदा कर रहे हैं।

मंदिर परिसर में पुलिसकर्मी होने की पुष्टि नहीं, जांच की आवश्यकता

हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह व्यक्ति वास्तव में पुलिसकर्मी था या किसी और ने खाकी वर्दी का उपयोग कर इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस प्रशासन से मामले को संज्ञान में लेकर जांच करने की अपेक्षा की जा रही है। यह घटना खाकी वर्दी की छवि पर एक धब्बा है, और जिम्मेदार अधिकारियों को जल्द ही इस मामले में दोषी का खुलासा कर कार्यवाही करनी चाहिए।

भक्तिन की न्याय की पुकार, मंदिर परिसर में सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद भक्तिन न्याय की उम्मीद में है और साथ ही मंदिर परिसर में इस तरह की घटनाओं को लेकर सुरक्षा के इंतजाम पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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