
बिलासपुर,,,, निगम के चहेते ठेकेदार ने करीब 11 महीने पहले नेहरू नगर का स्मार्ट सड़क बनाया। निर्माण में निगम ने करोड़ों रूपये खर्च किए। गुणवत्ताहीन सामाग्री और घटिया निर्माण के चलते एक साल पूरा होने से पहले ही नेहरू नगर की सड़क ने दम तोड़ दिया। प्रशासन के निर्देश पर करीब 15 दिन पहले पैंचिंग कार्य किया गया। लेकिन सड़क ने अभी से ही ठेकेदार कमल का पोल खोलना शुरू कर दिया है। मामले में घटिया सामग्री और सड़क निर्माण को लेकर भाजपा नेता वार्ड के पूर्व पार्षद श्याम भाई पटेल ने मोर्चा खोल दिया है। श्याम भाई ने बताया कि भ्रष्टचार की भी हद होती है। ठेकेदार ने पैंचिंग के नाम पर सिर्फ थूक पालिस यानी डामर घोलकर सड़क को पिला दिया है। मामले की शिकायत अपने नेता से करेंगे।
मुखिया से छिपाया गया
दो दिन पहले ही प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय ने दिग्गज मंत्रियों और भाजपा नेताओं के साथ करो़ड़ों रूपयों की लागत से तैयार नेहरू नगर चौक से उस्लापुर ओव्हरब्रिज यानी अचानक चौक तक की स्मार्ट सड़क का लोकार्पण किया। इस दौरान अधिकारियों ने नेहरू नगर चौक से गणेश नगर चौक को जोड़ने वाली स्मार्ट सड़क को मुख्यमंत्री की नजरों से दूर रखा। काश मुख्यमंत्री नेहरू नगर सड़क को देख लेते तो शायद निगम की कार्यप्रणाली और चहेते ठेकेदार की सच्चाई सामने आ जाती। लेकिन सड़क की दुर्दशा और पैचिंग के दौरान घटिया निर्माण को लेकर स्थानीय भाजपा नेता पूर्व पार्षद ने गहरी नाराजगी जाहिर की है।
निकलने लगी डामर की परत
भाजपा नेता श्याम भाई ने बताया कि निगम के अनुसार शासन ने करीब 15 करोड़ से अधिक रूपये निगम सड़कों की मरम्मत और पैचिंग वर्क के लिए आवंटित किया है। दुख की बात है कि मात्र 15 दिनों के अन्दर नेहरूनगर सड़क की पैचिंग वर्क ने ठेकेदार की होशियारी की पोल खोलकर रख दिया है। भाजपा नेता ने कहा कि मुश्किल से एक साल पहले गणेश चौक के पास स्थित हनुमान मंदिर से नेहरू चौक की सड़क को लाखों रूपये खर्च कर बनाया गया। निर्माण के मात्र 6 महीने में सड़क में जगह जगह गड्ठे उभर आये। लगातार शिकायत के बाद निगम ने पुरानी गलतियों से सीख नहीं लेते हुए चहेते ठेकेदार को ही पैचिंग वर्क का काम दे दिया। मात्र 15 दिनों के अन्दर जीरो गिट्टी के साथ डामर की परत निकलने लगी हैं।
श्याम ने बताया कि पैचिंग वर्क के नाम पर ठेकेदार ने डामर पोतकर निगम को बट्टा लगाया है। मामले की शिकायत अपने नेता विधायक अमर अग्रवाल से करेंगे। जांच के साथ ठेकेदार और निगम अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी करेंगे।
ठेकेदार पर इतनी मेहरबानी..आखिर क्यों…?
जानकारी देते चलें कि निगम में तथाकथित ठेकेदार की अच्छी पकड़ है। तमाम शिकायतों के बाद भी निगम को चहेते ठेकेदार के काम काज पर कुछ ज्यादा ही विश्वास है। यद्पि प्रमाणिक शिकायतें इससे कहीं ज्यादा है। जानकारी देते चलें कि 10-11 महीने पहले ही मंगला चौक में ठेकेदार की लापरवाही से ही दो मंजिला एक मेडिकल दुकान भर भराकर गिर गया। इस बात को लेकर काफी बवाल हुआ। किसी तरह मामले को सुलझाया गया। दुकान गिरने की तत्कालीन घटना के दो दिन पहले नाली निर्माण के दौरान एक मजबूर की हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आने से मौत हो गयी। इसके पहले हो हल्ला मचता..मामले को किसी तरह दबा दिया गया।
बताते चलें कि चहेते को ही टाउन हाल जीर्णाद्धार को लेकर करोड़ों रूपयों का ठेका दिया गया। प्रारम्भ में पहले चरण का काम तो ठीक ठाक चला। लेकिन कमिश्नर बदलते ही…बाकी काम थूक पालिस कर निपटा दिया गया। मजेदार बात है कि टाउन हाल निर्माण में एन्टी सीपेज तकनिकी का प्रयोग किया गया है। बावजूद इसके बरसात ने सारी कलई खोल कर दिया।
स्मार्ट सिटी के कई कार्यों का ठेका
जानकारी के अनुसार निर्माण में तमाम कमियों के बावजूद तथाकथित ठेकेदार पर निगम के अधिकारी जमकर प्यार लुटा रहे हैं। जबकि निगम को पता है कि ठेकेदार ने अब तक जितना काम किया है..सभी में खामिया ही खामियां है। बावजूद इसके ठेकेदार को करोड़ों रूपयों का स्मार्ट सिटी का काम मिला है। ऐसे में समझा जा सकता है कि निगम में अब तक किये गये 1080 करोड़ के काम की क्या गुणवत्ता होगी।
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