
बिलासपुर,,, शहर के गली-मोहल्लों में नियमों को दरकिनार कर अवैध तरीके से हॉस्टल चलाए जा रहे हैं! जिनका नगर निगम में रजिस्ट्रेशन तक नहीं है! जिला प्रशासन और पुलिस को हॉस्टल संचालक के द्वारा गुमराह किया जा रहा!जबकि पिछले कुछ सालों में यहां कई अप्रिय घटना भी हो चुकी है! निगम अधिकारी मामले में रिकॉर्ड बनाना दूर यह जानते तक नहीं है! कि कहां हॉस्टल संचालित हो रहे हैं! ये मानते जरूर हैं! कि बिना परमिशन ऐसा करना गलत है! पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है! व्यापार विहा, राजेंद्र नगर, विनोबा नगर, विद्या नगर, क्रांति नगर, भारतीय नगर, प्रियदर्शनी नगर, अज्ञेय नगर, नेहरू नगर, नर्मदा नगर, बंधवापारा, कोनी, मित्र विहार समेत शहर के मध्य व अरपापार सरकंडा समेत अन्य क्षेत्रों में मानो अवैध हॉस्टल की बाढ़ आ गई है! शहर जैसे-जैसे शिक्षा का हब बनता जा रहा है! बाहर से आकर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है! इसे देखते हुए अतिरिक्त कमाई के लिए लोग अपने घरों को हॉस्टल का रूप देकर छात्र-छात्राओं को रहने की सुविधा दे रहे हैं! वहीं अधिकांश मकान मालिक हॉस्टल खोलने के मापदंड को दरकिनार करते हुए बिना नियमों का पालन किए! अवैध तरीके से इसका संचालन कर रहे हैं! इसमें अवैध गर्ल्स हॉस्टल सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील है! इसके बाद भी इसे अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे हैं! हॉस्टल संचालित करने के लिए जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है! कि यदि कोई हॉस्टल खोलता है!तो सबसे पहले उसे नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराना होगा! साथ ही संबंधित थाने में लिखित सूचना देनी होगी! और रहने वालों की संख्या बताते हुए उनकी सुरक्षा का स्तरीय इंतजाम होने का ब्योरा देना होगा! पर ऐसा नहीं हो रहा है! हाल यह है! कि नगर निगम में पंजीयन तक नहीं कराया जा रहा है! वहीं संबंधित थाने में भी इसकी सूचना नहीं दी जा रही है! ऐसे में अगर कोई अप्रिय वारदात होने पर पुलिस मामले की जांच तो करती है! पर उनका कहना होता है! कि उन्हें हॉस्टल संचालित होने की जानकारी ही नहीं थी! सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण ही इस तरह की घटना होती है!

हॉस्टल संचालक नही कर रहे नियमो का पालन
इन नियमों का नहीं कर रहे पालन, टैक्स की चोरी आम
शहर की घनी आबादी में चलने वाले हॉस्टलों में रहने वालों को बकायदा खुद भोजन पकाने की सुविधा भी दी जाती है! इसके अलावा छोटी सी जगह पर हॉस्टलरों की भीड़ होने से अग्नि सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक स्थिति मानी जाती है! जबकि भवन मालिक आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम भी नहीं रखते! निगम अब इसकी पड़ताल भी करने नही जा रहा है! आवासीय का नक्शा पास कराकर हॉस्टल के रूप में कुछ लोग जगह का व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं! इससे उन्हें तो मोटी कमाई हो रही है! पर निगम के हाथ कुछ नहीं लगता!
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