
बिलासपुर,,, जिले में एक पेड़ माँ के नाम का अभियान का पौधारोपण को लेकर एक किस्सा बड़ा मशहूर है! कि सुबह नेताजी से तामझाम के साथ पौधा रोपण कराया गया! दोपहर पौधे को बकरा खा गया! और शाम को नेताजी बकरे को मारकर खा गए! पर बिलासपुर में तो हद हो गई! प्रधानमंत्री के एक पेड़ माँ के नाम अभियान को धत्ता बता लाखो रुपये खर्च कर मंगाए गए! पौधो को मोपका के शहरी गोठान में कचरे की तरह मरने फेक दिया गया! सारे पौधे यहां पड़े पड़े सूखकर मर गए!

हर साल की तरह इस साल भी पर्यावरण को संतुलित बनाने बारिश में पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया! प्रधानमंत्री के एक पेड़ माँ के नाम के अभियान के तहत बारिश के दौरान गाड़ियां काउ कैचर और अमला लगा कोटा क्षेत्र के बांसाझाल नर्सरी से पौधरोपण के लिए पौधों की खेप मंगा पौधों को मरने छोड़ दिया गया! ये पौधे शहरी गोठान मोपका में मृत पड़े है!

इन तस्वीरों में आप खुद देखिए शहरी गोठान में कचरे की तरह काले रंग की पॉलिथीन में भरे मृत पड़े ये वही पौधे है! जिन्हें निगम की गाड़ियां लगी अमला लगा इन पौधों की कई खेप मंगाई गई!

डीजल पेट्रोल लगे लाखो रुपये खर्च हुए पर जिस उद्देश्य से ये पौधे मंगाए गए थे! वह पूरा नही हुआ!
सवाल यह उठ रहा कि फिर हरियर छत्तीसग़ढ और एक पेड़ माँ के नाम का ढिंढोरा क्यो! यदि ये पौधों उसी गम्भीरता से लगाए जाते तो ये पौधे पर्यावरण को संतुलित करने में सहायक होते!

स्मार्ट सिटी और अन्य योजनाओं के नाम पर शहर और शहर सीमा से लगे सड़को के हजारों पेड़ काट दिए गए! पर जब सरकारी ढिंढोरे के बाद इन पौधों को लगाने की बारी आई तो अफसर A.C. चैंबर से बाहर ही नही निकले! नतीजतन ये पौधे गोठान के कचरे के ढेर में पड़े पड़े सूखकर मर गए! किसी को ध्यान और फुर्सत ही नही रहा!
ऐसा नही है! कि ऐसा पहली बार हुआ है! पिछले साल भी इसी तरह सरकारी नर्सरी से पौधारोपण के नाम पर मंगाए गए! पौधे टाउन हॉल के पीछे पड़े पड़े सूखकर मर गए! अंतर सिर्फ इतना है! कि इस बार फजीहत से बचने इन पौधों को काउ कैचर में भरवाकर शहरी गोठान में फिकवाया गया! ताकि मीडिया की नजर न पड़े लेकिन पड़ ही गई फिर फजीहत हो गई!
प्रधानमंत्री के अभियान का ये हाल
हर बार की तरह इस बार भी बारिश में पौधरोपण का लक्ष्य तय किया गया! पर लक्ष्य को कागज पर ही निबटा दिया गया! और पौधे रखे रखे मर गए! इससे साबित होता है! कि अफसर पर्यावरण और प्रधानमंत्री के एक पेड़ मॉ के नाम अभियान को लेकर कितने गम्भीर है!
जिम्मेदार कौन
नगर निगम में लाखों करोड़ों के बड़े बड़े गफलत सामने आए पर कुछ हुआ नही! अब पौधों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है! और उन पर क्या कार्रवाई की जायेगी! यह पूछना केवल बेमानी है! होना जाना तो कुछ नही है!
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