
बीजापुर,,, छत्तीसगढ़ में युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या ने स्थानीय पत्रकार समुदाय और समाज में गहरी क्षोभ और आक्रोश की लहर दौड़ा दी है! मुकेश, जो बीजापुर के निवासी थे! 1 जनवरी से लापता हो गए थे! और उनका शव 3 जनवरी की शाम को एक ठेकेदार के बाड़े में स्थित सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ! उनकी हत्या के विरोध में स्थानीय पत्रकारों ने सड़कों पर उतरकर नेशनल हाईवे पर चक्काजाम किया और पुलिस प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की!

मुकेश चंद्राकर का पत्रकारिता से जुड़ाव था! और वे सामाजिक मुद्दों को उजागर करने के लिए प्रसिद्ध थे! हाल ही में उन्होंने सड़क निर्माण में हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया था! जिसमें ठेकेदारों और अधिकारियों द्वारा गड़बड़ियां की जा रही थीं! इस खुलासे के बाद मुकेश को लगातार धमकियां मिल रही थीं! जिससे उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा था! बावजूद इसके, उन्होंने साहसिक तरीके से भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने का काम जारी रखा!
पुलिस जांच में यह सामने आया कि मुकेश की हत्या के पीछे ठेकेदार सुरेश चंद्राकर का हाथ था! जो उस सड़क निर्माण कार्य से जुड़ा हुआ था! जिसका मुकेश ने खुलासा किया था! जांच में यह भी पता चला कि सुरेश और उनके भाई रितेश ने मिलकर मुकेश की हत्या की साजिश रची थी! मुकेश की हत्या के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए हैं! और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है!
मुकेश चंद्राकर की हत्या के बाद स्थानीय पत्रकारों और नागरिकों में गुस्सा फैल गया! पत्रकारों ने सड़कों पर उतरकर न केवल उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि उनके परिवार को न्याय दिलाने की मांग भी की! उन्होंने इस घटना को पत्रकारिता के खिलाफ एक बड़ा हमला मानते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की अपील की!
बीजापुर में पत्रकारों ने इस घटना को सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि पत्रकारिता के अधिकारों पर हमला माना है! उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई तो यह देशभर में पत्रकारों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है! स्थानीय पत्रकारों ने यह भी कहा कि उनके काम को जनता तक पहुंचाने में कोई भी खतरा आ सकता है! लेकिन अगर सच्चाई सामने लाने की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की जाएगी! तो वे इसका विरोध करेंगे!
मुकेश चंद्राकर की हत्या के बाद से पत्रकारों ने अपनी सुरक्षा के मुद्दे पर भी सवाल उठाए हैं! पत्रकारिता में काम करने वाले लोग अक्सर उन मुद्दों को उजागर करते हैं! जो समाज में बदलाव लाने के लिए जरूरी होते हैं! लेकिन ऐसे मामलों में उनके जीवन को खतरे में डाला जाता है! इस घटना ने यह साबित कर दिया कि जब तक पत्रकारों की सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी! तब तक वे अपने कर्तव्यों को सही ढंग से नहीं निभा सकते!
इस घटना ने छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस प्रशासन से यह सवाल भी किया कि आखिरकार कब तक पत्रकारों को इस तरह की धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ेगा! स्थानीय पत्रकारों की मांग है! कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए! और ऐसे मामलों में पुलिस की तत्परता को सुनिश्चित किया जाए! ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों!
मुकेश चंद्राकर की हत्या ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है! और उनकी आवाज़ को दबाना या डराना गलत है! पत्रकारिता के अधिकार की रक्षा करना हर नागरिक और सरकार की जिम्मेदारी है! ताकि समाज में सच्चाई और न्याय की स्थापना हो सके!
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