
बिलासपुर,,, पीएम आत्मानंद स्कूल, तखतपुर में एक अत्यंत चौंकाने वाली घटना घटित हुई! जिसमें कक्षा ग्यारहवीं के एक विद्यार्थी पर रसायन शास्त्र के प्रायोगिक कार्य के दौरान एसिड डाला गया! घटना में पीड़ित विद्यार्थी बुरी तरह झुलस गया! और उसका शरीर गंभीर रूप से जल गया! लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इसे हल्के में लिया और बिना उचित उपचार की व्यवस्था किए! बच्चे को छुट्टी दे दी गई! बाद में, उसके परिवार ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर उपचार कराया! जहां उसकी गर्दन और पीठ पर जलने के कारण फफोले पड़े थे!

यह घटना बुधवार को उस समय हुई जब स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं के विद्यार्थियों को रसायन शास्त्र का प्रायोगिक कार्य कराया जा रहा था! इस दौरान एक छात्र ने जानबूझकर अपने सहपाठी पर एसिड डाल दिया! एसिड से जलने के कारण पीड़ित विद्यार्थी की चीखें गूंज उठीं! और शिक्षक और अन्य स्टाफ सदस्य मौके पर पहुंचे! हालांकि, स्कूल ने प्राथमिक उपचार प्रदान करने की बजाय! पीड़ित विद्यार्थी को छुट्टी दे दी और घर भेज दिया!
घटना के बाद, पीड़ित विद्यार्थी के माता-पिता ने उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया! जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति की गंभीरता को देखा! एसिड के प्रभाव से उसकी गर्दन और पीठ पर गहरे जलन के निशान और फफोले पड़ गए थे! परिवार ने तुरंत स्कूल प्रशासन से शिकायत की, जिसके बाद प्रधानाचार्य ने एसिड डालने वाले विद्यार्थी को 20 जनवरी तक के लिए विद्यालय से निष्कासित करने का निर्णय लिया!
पीड़ित के पिता ने बताया कि उनकी शिकायत यह है! कि स्कूल ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया! उन्हें न तो तुरंत इलाज की व्यवस्था दी गई! और न ही विद्यालय प्रशासन ने उचित कदम उठाए! इसके बजाय, पीड़ित विद्यार्थी और एसिड डालने वाले छात्र दोनों को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया! इस पर परिवार ने कड़ी आपत्ति जताई और प्रिंसिपल से शिकायत की! प्रधानाचार्य ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोषी छात्र को निष्कासित कर दिया! लेकिन यह सवाल खड़ा करता है! कि क्या स्कूल प्रशासन ने शुरू में स्थिति का सही तरीके से मूल्यांकन किया?
यह घटना शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा और विद्यार्थियों के कल्याण के मामले में बड़ी चिंता उत्पन्न करती है! विद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच इस प्रकार की हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है! स्कूलों को न केवल शैक्षिक वातावरण प्रदान करने की जिम्मेदारी होती है! बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की भी जिम्मेदारी होती है! इस प्रकार की घटनाओं के बाद, स्कूलों को ऐसी नीति अपनानी चाहिए! जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षा के साथ-साथ एक सुरक्षित और सशक्त वातावरण मिल सके!
हालांकि, स्कूल ने इस मामले में कार्रवाई की और दोषी विद्यार्थी को निष्कासित किया! लेकिन सवाल यह है! कि क्या स्कूल ने पर्याप्त और त्वरित प्रतिक्रिया दी? क्या इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए विद्यालयों में अधिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है? ऐसी घटनाओं से यह भी स्पष्ट होता है! कि विद्यालयों को विद्यार्थियों को सही तरीके से व्यवहार और जोखिमों के बारे में सिखाने के लिए भी कड़े उपाय करने होंगे!
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