
बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के लोफंदी गांव में हुई सात मौतों के मामले में प्रशासन का दावा है! कि इन मौतों का कारण ज़हरीली शराब नहीं, बल्कि अन्य कारण हैं! जैसे सर्पदंश, मछली खाना और हार्ट अटैक लेकिन सवाल यह उठता है! कि इतने बड़े मामले को इतनी जल्दी सुलझाने की कोशिश क्यों की जा रही है! खासकर जब मौतें कुछ ही घंटों में हुईं!

मृतकों की सूची:
- कन्हैयालाल पटेल (60 वर्ष)
- शत्रुहन देवांगन (40 वर्ष)
- बलदेव पटेल (52 वर्ष)
- कोमल प्रसाद लहरे (56 वर्ष)
- रामूराम सुनहले (59 वर्ष)
- कुन्नू देवांगन (35 वर्ष)
- देव कुमार पटेल (45 वर्ष)
प्रशासन द्वारा दिए गए कारण:
प्रशासन के अनुसार, इन मौतों के कारण में भिन्न-भिन्न चीजें बताई जा रही हैं!
- सामूहिक भोज के दौरान 3-6 फरवरी के बीच खानपान के कारण!
- नदी से मछली पकाकर खाने की वजह से!
- देव प्रसाद की मौत को सर्पदंश से जोड़कर बताया गया!
- बलदेव पटेल की मौत को कार्डियक अरेस्ट से जोड़ा गया, और इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र में यह उल्लेख किया गया है
लेकिन सवाल यह है! कि इतनी जल्दी इन कारणों का खुलासा क्यों किया गया! और यह कैसे संभव हुआ कि बलदेव पटेल की मौत का प्रमाण पत्र तुरंत जारी कर दिया गया?
पुलिस और आबकारी महकमे पर गंभीर आरोप:
लोफंदी गांव में कई वर्षों से कच्ची शराब का अवैध कारोबार चल रहा है! यहां के ग्रामीणों का आरोप है! कि स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग अवैध शराब का कारोबार चलवाते हैं! और उससे वसूली भी करते हैं! इसके बाद भी प्रशासन ने इस मामले पर ठोस कार्रवाई नहीं की, और गांव के आसपास के इलाके में यह धंधा खुलेआम चलता रहा!
ग्रामीणों का कहना है! कि प्रशासन ने “निजात” और “प्रहार” जैसे अभियानों की शुरुआत तो की, लेकिन नतीजे कुछ भी नहीं निकले! अब जब इतने लोग मरे हैं! तो प्रशासन एक बार फिर मौतों का कारण छिपाने में जुटा हुआ है!
चुनावी माहौल और प्रशासन की चुप्पी:
लोफंदी की इस घटना के बाद, प्रशासन ने इस पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने के बजाय उसे चुनावी माहौल से जोड़ने की कोशिश की! क्या चुनावी दबाव के कारण यह सारी घटनाएं छिपाई जा रही हैं? क्या सच्चाई को दबाकर प्रशासन ने चुनावी माहौल को साधने की कोशिश की है?
तारीखों और फैसलों में गड़बड़ी:
इतना ही नहीं, 8 फरवरी को एक आधिकारिक बयान जारी किया गया! जिसमें कहा गया कि बलदेव पटेल की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई थी! सवाल यह है! कि क्या इस रिपोर्ट को तुरंत जारी किया गया था? क्या यह मौत प्रमाण पत्र की वास्तविकता है! या फिर इसे किसी और वजह से लीक किया गया था?
आखिर किसके इशारे पर हो रहा है यह सब?
प्रदेश में सत्ता बदल चुकी है! लेकिन लोफंदी के मामले में प्रशासन का रवैया बिल्कुल वैसा ही है! जैसा पहले था! बड़े स्तर पर अवैध शराब के कारोबार से जुड़ी हुई यह घटना एक और बार यह साबित करती है! कि सत्ता के लोग हमेशा अपना पक्ष बचाने के लिए सच्चाई से मुंह मोड़ने की कोशिश करते हैं! प्रशासन द्वारा मृतकों के कारणों को सर्पदंश, मछली खाने और हार्ट अटैक से जोड़ने की यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही है!

इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रशासन और पुलिस विभाग की चुप्पी और गलत बयानबाजी इस बात का संकेत देती है! कि इस पूरे मामले में कुछ न कुछ तो छिपाया जा रहा है! अब यह देखना बाकी है! कि क्या इस बार प्रशासन अपने कर्तव्यों को सही तरीके से निभाएगा और इन मौतों की असली वजह का खुलासा करेगा, या फिर यह सब सिर्फ चुनावी जोड़-तोड़ का हिस्सा रहेगा!
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