
बिलासपुर,,, सिम्स प्रबंधन के बजाय विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का दावा करने वाला अपोलो अस्पताल अब गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ा सवाल बन कर रह गया है! अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज शुरू करने में भारी लापरवाही बरती है! पिछले चार महीनों में न तो पोर्टल पर पंजीकरण हुआ और न ही मरीजों को इलाज मिल पा रहा है! विधायक की चेतावनी और स्वास्थ्य विभाग के पत्रों का भी अस्पताल प्रबंधन पर कोई असर नहीं हुआ है!
बताया जा रहा है! कि इस देरी का कारण अस्पताल प्रबंधन का पैकेज दरों से जुड़ा हुआ है! आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली दरें अपोलो के लिए कम हैं! और वे मरीजों को अधिक कीमत पर इलाज देने की सोच रहे हैं! साथ ही, उन्हें तुरंत और नकद भुगतान की आवश्यकता है! जो अस्पताल को आयुष्मान योजना के तहत नहीं मिल पा रही है! यही वजह है! कि अपोलो प्रबंधन आम मरीजों को इस योजना का लाभ देने से कतरा रहा है! और नतीजतन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इलाज के खर्चे के रूप में संकट बढ़ता जा रहा है!
विधायक सुशांत शुक्ला ने अक्टूबर में इस मुद्दे पर अपोलो अस्पताल प्रबंधन से मिलकर चेतावनी दी थी! कि या तो वे आयुष्मान योजना के तहत इलाज शुरू करें, या फिर अस्पताल को छोड़ दें! हालांकि, इस चेतावनी के बाद भी चार महीने में कोई सुधार नहीं हुआ! अब स्वास्थ्य विभाग लगातार पत्र भेजने के बावजूद अपोलो अस्पताल इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है!
इस स्थिति में सवाल यह है! कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के मरीज कहां जाएं? जबकि सरकारी अस्पतालों की हालत भी बेहतर नहीं है! और सीएमएचओ के लेटर बम से भी कोई असर नहीं दिख रहा है! सिम्स जैसे सरकारी अस्पताल भी जटिल बीमारियों के इलाज में सक्षम नहीं दिख रहे हैं! और अपोलो के महंगे पैकेज के कारण मरीजों के लिए इलाज प्राप्त करना और भी कठिन हो गया है!
इसके अलावा, सरकार की जिम्मेदारी है! कि वह नागरिकों को उचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराए, लेकिन जब निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों की स्थिति इस तरह की हो, तो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह सवाल बड़ा बन जाता है! कि आखिर वे इलाज के लिए कहां जाएं…?
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