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5 Feb 2026, Thu

जांजगीर जिले में दिनदहाड़े चैन स्नैचिंग और लूट की घटनाओं से कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल…

छत्तीसगढ़,,, जांजगीर जिले में लगातार हो रही चैन स्नैचिंग और लूट की घटनाओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं! ताजा मामला सिटी कोतवाली क्षेत्र का है! जहां कांग्रेसी पार्षद विष्णु यादव की पत्नी से दिनदहाड़े चैन स्नैचिंग की घटना को अंजाम दिया गया! इस वारदात में दो अज्ञात नकाबपोश बदमाशों ने पार्षद की पत्नी से करीब डेढ़ तोले की चैन झपटकर फरार हो गए! घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से आरोपियों की पहचान करने का दावा किया है!

हालांकि, इससे पहले भी जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठ चुके हैं! एक महीने पहले हुए सरकारी शराब भट्टी में लाखों रुपये की लूट की घटना ने भी पुलिस की नाकामी को उजागर किया था! इस घटना में भी बदमाशों ने दिनदहाड़े कैश कलेक्शन टीम पर हमला कर 78 लाख रुपये लूट लिए थे! पुलिस ने इस मामले में भी आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया था! लेकिन अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है!

इन घटनाओं से यह साफ प्रतीत हो रहा है! कि जिले में अपराधियों का मनोबल बढ़ चुका है! और पुलिस प्रशासन की कमजोर कार्रवाई के कारण अपराधियों में कानून का कोई खौफ नहीं बचा है! दिनदहाड़े लूट और चैन स्नैचिंग जैसी घटनाएं खुलेआम हो रही हैं! और पुलिस इन अपराधों को रोकने में नाकाम साबित हो रही है! इससे यह सवाल उठता है! कि क्या पुलिस प्रशासन इस बढ़ते अपराध पर काबू पा सकेगा, या अपराधियों का आतंक और बढ़ेगा?

लोकप्रिय नेता और आम जनता के बीच इस बात को लेकर चर्चा हो रही है! कि क्या पुलिस केवल दावों और नाकाम कोशिशों के सहारे अपराधियों को पकड़ने की उम्मीद करती रहेगी, या इसे रोकने के लिए भी कोई ठोस कदम उठाएगी! सीसीटीवी फुटेज और नाकेबंदी जैसी रणनीतियों से जब तक अपराधियों को पकड़ा नहीं जाता, तब तक लोग असुरक्षित महसूस करेंगे और कानून व्यवस्था पर और सवाल खड़े होते रहेंगे!

इस स्थिति में पुलिस को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की आवश्यकता है! अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के साथ-साथ उन्हें यह एहसास कराना होगा कि कानून का डर अब भी कायम है! अगर जल्दी ही इन अपराधियों को पकड़ने में सफलता नहीं मिलती, तो जिले के नागरिकों में विश्वास टूट सकता है! और प्रशासन की छवि और कमजोर हो सकती है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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