
बिलासपुर,,,, छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा! हार का ठीकरा पार्टी के बागियों पर फूटते हुए! प्रदेशभर में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित किया गया! कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति, टिकट वितरण में नाखुशी और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती नाराजगी ने पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं! इसी बीच, बिलासपुर जिले के धर्मनगरी रतनपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा उबाल पर पहुंच गया और उन्होंने अपने ही विधायक अटल श्रीवास्तव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया!
यह मामला रतनपुर के महामाया चौक में हुआ, जहां कांग्रेस के तत्कालीन ब्लॉक अध्यक्ष रमेश सूर्या के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता एकत्र हुए और विधायक अटल श्रीवास्तव का पुतला फूंका! विरोध प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने “कोटा बचाओ, विधायक हटाओ” और “अटल की दादागिरी नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए! उनका आरोप है! कि विधायक ने चुनाव के दौरान पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी करते हुए अयोग्य उम्मीदवारों को टिकट दिया! जिससे कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा!
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए पार्टी के ईमानदार और समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया! उनका कहना था! कि टिकट वितरण के समय विधायक ने उन कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी, जो अन्य राजनीतिक पार्टियों से आए थे! जबकि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया! इससे न केवल पार्टी के भीतर असंतोष पैदा हुआ, बल्कि चुनाव में पार्टी की हार का कारण भी बना!
पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष रमेश सूर्या और अन्य नेताओं ने विधायक अटल श्रीवास्तव पर गंभीर आरोप लगाए! उनका कहना था! कि विधायक ने पार्टी के संघर्षशील कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर चुनावी टिकट के लिए बाहरी लोगों को महत्व दिया! इसके कारण पार्टी की छवि पर बुरा असर पड़ा और परिणामस्वरूप पार्टी को करारी हार मिली! इन आरोपों के अलावा, विधायक पर यह भी आरोप था! कि उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार देवेंद्र यादव के खिलाफ अपने खास सुदीप श्रीवास्तव को निर्दलीय चुनावी मैदान में उतारने की कोशिश की, जिससे पार्टी के उम्मीदवार को नुकसान हुआ और कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई!
कांग्रेस के भीतर बढ़ती हुई अंतर्कलह और कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है! रतनपुर में हुई इस घटना से यह साफ है! कि कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण और पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी तेजी से बढ़ रही है! अगर पार्टी इस असंतोष को समय रहते नियंत्रित नहीं करती, तो आने वाले चुनावों में इसे और भी बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है!
इस पूरी स्थिति ने यह साबित कर दिया कि चुनावी परिणामों का असर केवल पार्टी के रणनीतिक फैसलों पर ही नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं की संतुष्टि और समर्पण पर भी निर्भर करता है!
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