
बिलासपुर,,, छतौना में 12 दिन पहले आबकारी विभाग द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई में जब्त की गई एक करोड़ रुपये से अधिक की अवैध शराब के मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है! जहाँ जांच के दौरान 10 पेटी शराब गायब पाई गई है! जिससे मामला और भी संदिग्ध हो गया है!यह शराब पंकज सिंह, जो कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नगरीय निकाय चुनाव में शामिल हुए थे! जो चुनाव के नाम से मंगवायी गई थी! पंकज सिंह ने चुनाव में शराब बांटने के लिए अवैध तरीके से शराब की यह खेप मंगवाई गई थी!
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पंकज सिंह ने गोवा से भूटान के लिए अवैध शराब की सप्लाई के लिए यह शराब मंगवाई थी! हालांकि, चुनाव के दौरान प्रशासन की सक्रियता से यह शराब जब्त कर ली गई! शराब के 1,000 पेटियों में से 10 पेटी गायब पाई गई हैं! जो इस मामले को और भी पेचीदा बना देती हैं! यह शराब न केवल चुनाव में बांटने के लिए मंगवाई गई थी! बल्कि अवैध शराब तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ी हुई थी!
पंकज सिंह का अवैध शराब तस्करी में गहरा संबंध
पंकज सिंह एक बड़ी अवैध शराब तस्करी का कारोबारी है! और इसके कारोबार को कई दिग्गज नेताओं का संरक्षण प्राप्त है! जिसके कारण वह अब तक पुलिस और आबकारी विभाग के रडार से बाहर रहा था! इस बार हालांकि, विभाग ने पंकज सिंह के इस अवैध शराब कारोबार को पकड़ने में सफलता पाई है! हालांकि, वह मुख्य आरोपी अब भी फरार है! और उसकी गिरफ्तारी के लिए आबकारी विभाग और पुलिस लगातार प्रयास कर रहे हैं! लेकिन इस मामले में गिरफ्तारियां और कार्रवाई की गति धीमी बनी हुई है!
आरोपी ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज
जब्त की गई शराब के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है! कंटेनर के ड्राइवर, शिव कुमार सैनी के खिलाफ अमानत में खयानत का मामला दर्ज किया गया है! ड्राइवर पहले से ही जेल में बंद है! फिर भी यह घटना सवालों के घेरे में है! कि आबकारी विभाग और पुलिस ने अभी तक मुख्य आरोपी पंकज सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की! इस मामले में कई और राज खुलने की उम्मीद जताई जा रही है! क्योंकि पंकज सिंह के खिलाफ पहले भी अवैध शराब कारोबार के मामले सामने आए हैं! लेकिन राजनीतिक संरक्षण के कारण उस पर कभी ठोस कार्रवाई नहीं की गई!
क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई में सुस्ती?
पंकज सिंह को जो राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था! वह अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बन चुका है! सूत्रों के अनुसार, स्थानीय राजनीतिक दबाव के कारण इस तस्करी के मामले में कार्रवाई धीमी रही है! आबकारी विभाग और पुलिस विभाग इस मामले को लेकर गंभीर नहीं दिखते, जबकि यह मामला एक बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है! सवाल उठ रहा है! कि क्या विभाग इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं! या फिर इस पूरी कार्रवाई में राजनीतिक दबाव है! जो मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को मुश्किल बना रहा है!
आगे क्या होगा?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं! और पंकज सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और आबकारी विभाग किस तरह से कदम उठाते हैं!फिलहाल, आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है! और विभाग का दावा है! कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं!
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