
बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में आबकारी विभाग के नाम पर एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है! जिसमें बेरोजगार युवाओं से नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों रुपये की वसूली की गई! पीड़ितों का आरोप है! कि विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारियों के नाम पर एक प्लेसमेंट कंपनी ने उन्हें शराब दुकानों में सुपरवाइजर और सेल्समैन की नौकरी दिलवाने का वादा किया, लेकिन बाद में यह सभी वादे झूठे साबित हुए! नौकरी मिलने के बाद भी उन्हें न तो पे-रोल में डाला गया, न ही वेतन मिला, और अंततः उन्हें बिना किसी सूचना के नौकरी से निकाल दिया गया! इस धोखाधड़ी के खिलाफ पीड़ितों ने कलेक्टर और एसपी से न्याय की गुहार लगाई है!

आरोपों के अनुसार, तखतपुर शराब दुकान के सुपरवाइजर साखी लाल की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। पीड़ितों का कहना है! कि साखी लाल ने उन्हें यह भरोसा दिलाया था! कि वे नौकरी मिलने के बाद सरकारी कर्मचारी बन जाएंगे, जिसके लिए उन्हें दो से ढाई लाख रुपये देने होंगे! इसके बाद सभी युवाओं ने मिलकर 20 लाख रुपये कैप्सटन प्लेसमेंट कंपनी के जिला प्रतिनिधि रंजीत सिंह और उसके सहयोगियों को अपोलो हॉस्पिटल के पास स्थित कार्यालय में दिए थे! इस पैसे का बड़ा हिस्सा अधिकारियों को देने की बात भी कही गई थी।

31 अक्टूबर 2024 को पीड़ितों ने शराब दुकानों में काम शुरू किया था, लेकिन बाद में उन्हें यह पता चला कि उनका नाम कंपनी के पे-रोल में शामिल नहीं किया गया था और वे नौकरी से निकाल दिए गए। इस बीच, कंपनी ने उन्हें डेढ़ महीने का वेतन भी नहीं दिया। जब पीड़ितों ने अपनी शिकायत की, तो उन्हें आश्वासन मिला कि पैसे वापस किए जाएंगे, लेकिन कंपनी के कर्मचारियों ने रुपये लौटाने से इनकार कर दिया।
इस मामले में पुलिस और प्रशासन से लगातार शिकायत करने के बावजूद पीड़ितों को कोई राहत नहीं मिली। आरोप है कि जब नए सहायक आयुक्त ने कार्यभार संभाला, तो उन्होंने रंजीत सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन इसके बाद कंपनी ने एक नए प्रतिनिधि अपूर्व मिश्रा को नियुक्त किया, जिन्होंने बिना किसी सूचना के सभी युवाओं को नौकरी से बाहर कर दिया। अपूर्व मिश्रा का कहना था कि क्योंकि ये लोग पे-रोल में नहीं थे, इसलिए उन्हें वेतन नहीं दिया जा सकता।
सी.एस.एम.सी.एल. वेवपोर्टल में इन युवाओं की उपस्थिति दर्ज है और उन्होंने 45 दिन काम भी किया, लेकिन इसके बावजूद उनका वेतन अभी तक नहीं दिया गया है। इस पूरी घटना ने बिलासपुर आबकारी विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पीड़ितों ने न्याय की उम्मीद जताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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