
बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में कानून व्यवस्था हाशिए पर जाती नजर आ रही है.. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह द्वारा चलाएं जा रहे प्रहार अभियान का व्यापक असर को देखने को मिला, लेकिन शहर में एक बार फिर नशे, सट्टा अवैध कबाड़ का मकड़जाल फैलता जा रहा है.. बिलासपुर पुलिस की नाक कहें जाने वाले सिविल लाइन थाना क्षेत्र में नाबालिग द्वारा खुलेआम गांजा बेचते वीडियो सामने आया है, पूरा वीडियो कुदुदण्ड क्षेत्र का बताया जा रहा है, नदी किनारे कुछ युवकों और नाबालिगों के द्वारा गांजा का विक्रय किया जा रहा है.. इतना ही नहीं गांजा बेचने वाले युवक आपस में गोली बेचने की बात करते हुए भी कैमरे में रिकॉर्ड हुए है..
वीडियो में दिखाई दे रहे युवक एक दूसरे से गोली बेचने की बात करते हुए दिखाई दे रहे है.. जिसमें एक युवक दूसरे को बाहर से गोली लाकर बेचने के लिए लड़के दिलाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरा युवक बोल रहा है कि गोली को बेचने का काम वो कर लेगा, इस पर युवक ने कहा कि, माल लेने बाहर गया है वो लेकर आएगा तो काम चालू होगा, नहीं तो बाहर से लेकर खुद आयेगा और बेचेगा, अंदर जाना पड़ेगा तो कोई टेंशन है, सोचने वाली बात है कि, नशे का खुलेआम व्यापार संचालित करने की बात करने वाले युवकों को पुलिस और कानून का कोई डर नहीं है.. और न ही अंदर जाने का उन्हें कोई डर सता रहा है..
बड़ी बात है कि, बिलासपुर एक ओर स्मार्ट सिटी का रूप लेता जा रहा है दूसरी ओर नशे का साम्राज्य भी बढ़ता जा रहा है, एक तरफ बिलासपुर पुलिस द्वारा प्रहार और संवेदना अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन दूसरी तरफ शहर में सट्टा, नशे का सामान और कबाड़ का अवैध धंधा खुलेआम फल फूल रहा है, ऐसे में पुलिस द्वारा चलाएं जा रहे अभियानों का कितना असर पड़ेगा या कानून व्यवस्था कितनी बेहतर हो पाएगी यह सोचने वाली बात है..
बिलासपुर पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच विश्वास देखने को मिलता है जब से बिलासपुर की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली है तब से ही चाकूबाजी, गंभीर अपराध की घटनाओं में भारी कमी आई है लेकिन थाना में पदस्थ होने के बाद भी सिविल ड्रेस में घूमकर सेटिंग करने वालों की वजह से सट्टे कबाड़ और नशे का व्यापार फल फूल रहा है.. सिविल लाइन, सरकंडा, कोतवाली, सिरगीट्टी थाने में सिविल ड्रेस में चर्चित आरक्षकों की जुगलबंदी अवैध व्यापार करने वालों से बहुत बढ़िया जमती है.. विभागीय सूत्र और लोग इन्हें थानों का कोषाध्यक्ष तक कहते हैं, इन्हीं के संरक्षणों की वजह से अवैध व्यापार जमीनी स्तर पर फलता फूलता है और अधिकारियों को इसकी भनक भी नहीं लगती है.. लंबे समय इनका एक ही जगह पर टीके रहना भी चर्चा का विषय बना रहता है.. भले ही कई थाना प्रभारी एक जगह से दूसरी जगह चले जाते है लेकिन इनका रसूख इतना है कि, तबादले के कुछ दिनों के अंदर ही ये वापस अपनी जगह पहुंच जाते है..
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