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1 Feb 2026, Sun

बिलासपुर में पानी का हाहाकार, जर्जर टैंकर बनें कबाड़, अफसर बेपरवाह, टेंडरबाजी में व्यस्त, गर्मी में जनता बेहाल, मरम्मत से मिल सकती थी राहत, पर प्रशासन उदासीन, सुशासन के दावे फेल, हालात बेकाबू…

00  सुशासन बाबू के राज और उपमुख्यमंत्री के शहर का ये हाल

00  टैंकरों और टँकियो की मरम्मत करा दे सकते है राहत

बिलासपुर,,,  अगर भीषण गर्मी में आपके इलाके में पानी की संकट है! तो निगम प्रशासन पर उम्मीद करना बेमानी साबित हो सकता है! क्योंकि यहाँ के अफसरों को उपलब्ध संसाधनों से व्यवस्था बनाने के बजाए टेंडर के खेल में रुचि है! ये हम नही कह रहे ये नजारा कह रहा आप भी देख लीजिए!

नाली के अंदर पानी भरते तिफरा के वार्डवासी

ये नगर पालिक निगम के तिफरा ज़ोन क्रमांक 2 की तस्वीर है! जिसके ठीक पीछे की बस्ती में पानी के लिए कैसे हाहाकार मचा है! कैसे यहां के रहवासी भीषण गर्मी में पीने और निस्तारी का पानी भरने नाले-नालितो में बाल्टी गुंडी रखकर भरते है!

कैसे जल संकट के बीच जीवन यापन कर रहे, कैसे गहराते जल संकट के कारण महिलाओ और बचचियो को दूर दराज के हैंड पम्प और बोर से पानी डोहारकर लाना पड़ रहा मीडिया की टीम ने आपको अपने न्यूज़ के माध्यम से सब दिखाया और बताया था! अब तिफरा ज़ोन कार्यालय के पीछे के इन तस्वीरों को आप खुद देखिये कैसे बिना पहिये के टैंकर पत्थर से टिककर जंग खाते पड़े है! तो कोई फ़टेहाल खड़ी है! कैसे जलसंकट वाले वार्डो के लिए खरीदी गई ट्रॉली टैंकरों को यहां पीछे कबाड़ की तरह फेक दिया गया है!

जंग खाता निगम का पानी टैंकर

जो जर्जर और जंग खाते पडे है! लगता है! जैसे अफसरों में काम करने की क्षमता ही खत्म हो गई है! यदि होती तो हालात को देखते हुए इस ज़ोन के अफसर टैंकर पर रंगरोगन करा और टायर बदल इनको जलसंकट वाले इलाकों में दौडवा सकते थे!

बिना पहिये का निगम का टैंकर

सड़ते जंग खाते पड़े 2500-2500 लीटर वाले आधा दर्जन पानी टैंकों को रंगरोगन करा प्रभावित इलाकों में रखवाकर टैंकरों के जरिये इन्हें पानी के लिए तरसते लोगो की प्यास बुझा सकते थे!  पर किसी को कोई मतलब ही नही है, जो न्यायधानी के साथ अन्याय है!

ईट के सहारे खड़ा निगम का टैंकर

सरकार ने इन्हें जनता की समस्याओं का निवारण करने के लिए बिठा रखा, 8-8 जॉन बनाये गए है! ताकि लोगो को अपने ही क्षेत्र में गुहार लगाने पर पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं मिल सके पर थकहा और टेंडर का खेल खेलने वाले अफसरों के पास ये सब देखने गुनने और जनता को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में कोई रुचि ही नहीं है, स्थिति दुनिया जाए साले भाड़ म टाइप का है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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