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1 Feb 2026, Sun

मोपका खसरा 993 भूमि घोटाले में पीएमओ सख्त, डिप्टी कलेक्टर को जांच की जिम्मेदारी, फर्जी पट्टा और विक्रय पंजीयन हो सकते हैं शून्य…

बिलासपुर,,,   मोपका में खसरा क्रमांक 993 सरकारी जमीन का बंदरबांट इस कदर हुआ कि मानो अधिकारियों ने नियम क़ानून का परवाह ही नही किया? शासन के आदेश पर जांच भी हुआ तो जिस स्तर पर जांच पूरा किया जाना था! उस स्तर पर नहीं किया गया! बल्कि इसमें भी भ्रष्टाचार की बू आने लगी! हाल ही में कलेक्टर अवनीश शरण के द्वारा बिना अनुमति के पट्टा भूमि के विक्रय पंजीयन को शून्य किया गया! किंतु मोपका के खसरा क्रमांक 993 के अनगिनत विभक्त खसरा क्रमांक जिसे पट्टाधारियों ने बिना अनुमति के ही खरीदी बिक्री किया है! उसे आज तक शून्य नहीं किया गया! यही नहीं भू -माफियाओं के पास कई जमीन क्या आसमान से उड़कर आ गया ? राजस्व अभिलेखों में फर्जी पट्टा के दम पर बेशकीमती जमीन को भू – माफियाओं के नाम पर दर्ज कर दिया गया। आज भी कई लोग खसरा क्रमांक 993 से विभक्त खसरा क्रमांक का पट्टा लेकर घूम रहे है।

सरकारी जमीन को निजी बनाने वाले राजस्व अधिकारी और भू-माफियाओं के खिलाफ केंद्र सरकार से शिकायत** खसरा क्रमांक 993 की सरकारी जमीन घोटाले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग** मोपका में चलेगा बुलडोजर, सरकारी जमीन के अभिलेख होंगे दुरुस्त ?** राजस्व अभिलेखों में उसी खसरा की जमीन उनके नाम पर दर्ज भी है लेकिन उन लोगों को उनका जमीन कहा है । यह पता ही नही, मतलब मोपका के खसरा क्रमांक 993 के मौका रकबा में काबिज़ ग्रामीणों के नाम पर पट्टा वितरण करने की बजाए, नियम विरुद्ध मनमाना पट्टा वितरण किया गया है। एक तरह से भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों ने भू – माफियाओं को पट्टा बेचा है। शिकायतकर्ता की माने तो शासकीय खसरा के पट्टाधारियों ने राजस्व न्यायालय के बिना अनुमति स्वत्व की जमीन को बेच दिया और राजस्व आधिकारियों ने फटाफट नामांतरण भी कर दिया। यह सब बिना राजस्व आधिकारियों के भ्रष्टाचार के बिना संभव नही था। यहां तक कि जांच में यह भी बात सामने आया है कि बिना सक्षम अधिकारी के पट्टा वितरण किया गया है। उसके बाद भी भ्रष्टाचारियों और भू – माफियाओं के खिलाफ आज तक ठोस कार्यवाही नही किया गया। जिसके कारण जनहित में प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायतकर्ता ने शिकायत प्रस्तुत किया है।   जिस पर पीएमओ के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर शिव कंवर बिलासपुर को जांच का जिम्मा सौंपा गया है । अब देखना होगा कि जांच कार्यवाही का प्रतिवेदन प्रधानमंत्री कार्यालय को कब तक सौंपा जाता है?

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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