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18 Mar 2026, Wed

खदान से 25 कि.मी के भीतर धड़ल्ले से चल रहे वैध-अवैध कोल डिपो, प्रशासन मौन, नियमों की उड़ रही धज्जियां, कोयले की चोरी से फल-फूल रहा करोड़ों का काला कारोबार…

बिलासपुर,,, सरकारी कोयला खदान के आसपास पिछले कई साल से दर्जनों वैध – अवैध कोल डिपो संचालित किया जा रहा है! जबकि खदान से 25 किलो मीटर के दायरे में कोई कोल डिपो, कोयला क्रेशर प्लांट या कोल वाशरी नहीं खुल सकता! पहली बार ऐसे कोल डिपो का सर्वे करके रिपोर्ट मंगाया गया है! यदि मंत्रालय में बैठे अधिकारी सख्त हुए तो दर्जनभर कोल डिपो में ताला लग सकता है! धंधे से जुड़े लोगों का कहना है! कि सरकारी कोयला खदान से कोयला चोरी करना आसान है! इसीलिए आसपास डिपो खोले जा रहे है! इनमें से कइयों को पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है! जिस कोयले को लेकर कांग्रेस की सरकार में बवाल हुआ था! और कई अधिकारी लेवी वसुली के आरोप में जेल के अंदर है! सत्ता बदली लेकिन कोयला चोरों के धंधे में कोई फर्क नहीं पड़ा! जो कोयला व्यवसायी  पहले सूर्यकांत तिवारी, सौम्या चौरसिया और अनिल टुटेजा को लेवी देते थे!वे भी कोयला व्यापारी अब किसी और की दे रहे है! कोयले के धंधे में सब वैसा ही चल रहा है! जैसे पहले चल रहा था! सरकार को डेढ़ साल हो गए लेकिन सरकारी खदान जमुनापाली के आसपास दर्जनभर से ज्यादा वैध – अवैध कोल डिपो चल रहे है! सभी कोल डिपो संचालक को किसी न किसी नेता, मंत्री, अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है! यही कारण है! कि ये कोल डिपो नियम कानून को तक पर रखकर संचालित हो रहे है। जबकि नियम के अनुसार खदानों से 25 किलोमीटर के दायरे में कोई डिपो नहीं खुल सकता। इस नियम के अनुसार जमुना पाली से संदरी तक का दायरा आता है। इस बीच में दर्जनों कोल डिपो है। जिसमें से कई अवैध है। कोल माइंस रेग्युलेशन्स 2017 के मुताबिक, खदान से 25 किमी के भीतर कोई भी डिपो गैरकानूनी माना जाएगा और इसके लिए प्रति दिन ₹1 लाख तक का जुर्माना या लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है। जानकारों की माने तो ये कोल डिपो नियम कानून की धज्जियां तो उड़ा ही रहे है। खदानों से निकलने वाले कोयले की चोरियां की कर रहे है। यही कारण है कि इस धंधे के जुड़े लोग देखते ही देखते करोड़ो में खेलने लगने लगते है और लाखों की गाड़ियों में घूमते नजर आते है। माइनिंग और पुलिस विभाग की टिम बीच बीच में जांच करती है लेकिन वह भी खानापूर्ति साबित होती है।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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