
0 उत्तेजित परिजनों और ग्रामीणों ने कहा इस फैसले पर प्रशासन करे पुनर्विचार
0 आखिर क्यों दो माह से दबाकर रखने के बाद कराया एफआईआर, क्या फरार होने दे रहे थे मौका
बिलासपुर ,,, बिलासपुर का जिला शिक्षा विभाग इन दिनोंएक आदेश को लेकर फजीहत में पड़ गया है। मामला पुलिस रिकार्ड में फरार पास्को एक्ट के आरोपी शिक्षक की बहाली का है। जिसकी तखतपुर पुलिस को तलाश है। ऐसे में छात्रा से बेड टच के आरोपी शिक्षक की बहाली पर सवाल खड़े हो रहे है। कि अरे बाबा जब जिले के शिक्षा विभाग का ये हाल है, तो उस नई पीढ़ी का क्या होगा, क्योकि सवाल विद्यार्थियों की सुरक्षा का है।मिली जानकारी के मुताबिक तखतपुर विकासखंड के प्राथमिक स्कूल खुड़ियाडीह शिक्षक अशोक कुर्रे के खिलाफ स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं ने मारपीट गाली गलौज और बेड टच की शिकायत की थी। बताया जा रहा कि जिला शिक्षा अधिकारी की जांच टीम ने इन आरोपों की पुष्टि भी कर दी। गत 27 फरवरी 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी, तखतपुर ने इस मामले की सूचना अप्रैल के अंतिम सप्ताह में तखतपुर पुलिस को दी। आरोप है कि लेनदेन या राजनीतिक दबाव के चलतें शिक्षा विभाग ने घोर लापरवाही बरतते हुए इस गम्भीर मामले की जांच में पुष्टि होने के बाद भी पुलिस को सूचना देने में दो महीने का समय लगा आरोपी शिक्षक को फरार होने का पूरा मौका दे दिया । छात्रा के बयान के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ पास्को एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला भी दर्ज कर लिया । शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे अतिसंवेदनशील मामले में लेटलतीफी से मिली जानकारी के कारण पास्को एक्ट का आरोपी शिक्षक आज तक पुलिस रिकार्ड के फरार है। जिसकी तलाश भी की जा रही है। वहीं पुलिस रिकार्ड में फरार और जांच के दोषी पाए जाने के बाद भी शिक्षा अधिकारी ने दोषी शिक्षक अशोक कुरें को ज्वाइनिंग भी दे दी।इस मामले में थाना तखतपुर में एफआईआर क्रमांक 0199/25 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। एफआईआर के बाद शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
हालांकि, इस गंभीर आरोप और दर्ज एफआईआर के बावजूद 15 मई को जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर ने उक्त शिक्षक को पुनः बहाल कर दिया। शिक्षक अशोक कुर्रे को अब प्राथमिक शाला खपरी, तखतपुर में पदस्थ किया गया है।
इधर पीड़ित पक्ष और समाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोपी फरार शिक्षक की बहाली को लेकर बवाल खड़ा कर शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में पुनः विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, ऐसे मामलों में लिप्त शिक्षकों को बहाल करना छात्र सुरक्षा के लिहाज से अनुचित है।
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