
00 मामला संग्रहण केंद्रों में रखे अतिशेष धान को औने पौने दाम में नीलाम करने का
00 आधे से 76 हजार मीट्रिक टन धान अब भी संग्रहण केंद्रों में पड़े
बिलासपुर,,, 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर खरीदे गए अतिशेष धान को संग्रहण केंद्रो में रखवाने के बाद सरकारी तंत्र को 19 और साढ़े 19 सौ में नीलाम करना पड़ा! यहां रखे धान की नीलामी प्रक्रिया से सरकार को लगभग डेढ़ अरब रुपए से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है! ये तो रेट का नुकसान है! इसके लिए सरकार को अमले और संग्रहण केंद्रों में जो व्यबस्था बनाने जो खर्च करना पड़ा उसका तो कोई हिसाब- किताब ही नही है!
नान और एफसीआई को देने के बाद जिले में 1100 स्टेक यानि 1 लाख 36 मीट्रिक धान संग्रहण केंद्रों में रखवाया गया था। जिसमे से 60 हजार मीट्रिक टन धान को नीलाम करना बताया जा रहा। जिसका उठाव बायर और राइस मिलरों द्वारा कराया जा रहा।आधे से अधिक यानि 76 हजार मीट्रिक टन धान अब भी संग्रहण केंद्रों में पड़े है। बारिश भी शुरू हो चुकी है ऐसे में बारिश में धान के खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।
जानकारों का कहना है कि धान खरीदी से हुए लगभग पौने दो करोड़ के नुकसान 5500 करोड़ का महतारी वंदन, मुफ्त का चावल समेत ऐसी कई चुनावी
वायदे है जो सरकार के लिए गले को घण्टी साबित हो रही है।
संग्रहण केंद्रों में धान रखना घाटे का सौदा
बीते 5 वर्षों से संग्रहण केंद्रों में धान नहीं रखा जाता था। खरीदी केंद्रों से सीधे मिलर्स के पास घान परिवहन किया जाता था, ताकि संग्रहण केंद्रों में धान रखने से शासन प्रशासन को दोहरा नुकसान न उठाना पड़े ।
समितियों से संग्रहण केंद्र और संग्रहण केंद्रों में राईस मिलर्स के पास पहुंचाने में परिवहन और हमाली खर्च में करोड़ों रूपए का नुकसान हुआ जो प्रशासन के लिए घाटे का सौदा है।
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